क्वाड शिखर सम्मेलन पर संकट के बादल; क्या भारत में होगी बैठक?

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में होने वाले प्रस्तावित क्वाड शिखर सम्मेलन को लेकर अब अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिए बनाए गए इस समूह की बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष नेताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सभी नेताओं का एक साथ नई दिल्ली पहुंचना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
क्वाड की स्थापना हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। इस मंच के जरिए चारों देश समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर काम करते हैं। हालांकि, बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अब इसके भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

 

ध्यान रहे कि जापान की प्रधानमंत्री साएने ताकाइची इस वर्ष भारत की यात्रा कर चुकी हैं। ऐसे में उनका कुछ ही समय बाद दोबारा नई दिल्ली आना आसान नहीं माना जा रहा है। जापान इस समय अपनी घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
जापान क्वाड का प्रमुख सदस्य है और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर उसकी चिंता लगातार बनी हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर की बार-बार यात्राओं के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ट्रंप की भारत यात्रा पर नहीं मिला संकेत : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। क्वाड शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि अमेरिका इस समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
माना जा रहा है कि अमेरिका इस समय चीन के साथ अपने संबंधों को लेकर बेहद सतर्क है। 3 सितंबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के व्हाइट हाउस दौरे की संभावनाओं के बीच वाशिंगटन ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहेगा जिससे बीजिंग के साथ तनाव अचानक बढ़ जाए।
वहीं क्वाड को लंबे समय से चीन की बढ़ती ताकत के जवाब में एक रणनीतिक मंच के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि, अमेरिका अब चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।

व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच मतभेद जारी हैं, लेकिन दोनों देश किसी बड़े टकराव से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में क्वाड की गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
क्वाड की पहचान में बदलाव की चर्चा : क्वाड को हमेशा हिन्द-प्रशांत) क्षेत्र की रणनीति से जोडक़र देखा गया है। भारत के लिए हिन्द महासागर का महत्व बेहद अधिक है, क्योंकि उसकी समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियां इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं।
हालांकि, हाल के समय में केवल प्रशांत क्षेत्र पर अधिक जोर दिए जाने की चर्चाओं के कारण यह सवाल उठने लगा है कि क्या क्वाड की प्राथमिकताओं में बदलाव आ रहा है।
ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी भी अहम : क्वाड के चौथे सदस्य ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री की भी निकट भविष्य में भारत यात्रा का कोई स्पष्ट कार्यक्रम नहीं है। ऑस्ट्रेलिया प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है, लेकिन उसकी अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं भी हैं। चारों देशों के नेताओं की तारीखों का तालमेल बैठाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
क्या टल सकता है शिखर सम्मेलन? : यदि सभी नेताओं की एक साथ मौजूदगी संभव नहीं हो पाती है तो क्वाड शिखर सम्मेलन को आगे बढ़ाया जा सकता है या फिर इसे वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
हालांकि, क्वाड की राजनीतिक ताकत शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बैठक से ही आती है। इसलिए केवल अधिकारियों या मंत्रियों की बैठक से वह प्रभाव नहीं बन पाएगा जो नेताओं के शिखर सम्मेलन से बनता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है क्वाड? : भारत क्वाड को केवल चीन विरोधी मंच के रूप में नहीं देखता। नई दिल्ली इसे समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखती है।
यदि क्वाड सम्मेलन में देरी होती है तो इससे क्षेत्रीय राजनीति में अलग संदेश जा सकता है। भारत के लिए जरूरी होगा कि वह अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखे।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि क्वाड शिखर सम्मेलन का आयोजन अब कई कूटनीतिक समीकरणों पर निर्भर हो गया है। जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं की उपलब्धता, अमेरिका की चीन नीति और वैश्विक परिस्थितियां यह तय करेंगी कि यह बैठक कब और किस रूप में होगी। फिलहाल क्वाड के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में अपनी रणनीतिक भूमिका को कैसे बनाए रखता है। भारत के लिए यह मंच हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर बना हुआ है।