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Tuesday, September 15, 2026
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2014 से 2026 तक 203 नए केंद्रीय विद्यालय, फिर भी हर तहसील तक नहीं पहुंची सुविधा

प्रकाशित: 30 Aug 2026, 8:03 PMअपडेट: 30 Aug 2026, 8:04 PMपढ़ने का समय: 2 मिनट
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नई दिल्ली। देश में केंद्रीय विद्यालयों के विस्तार को लेकर सामने आए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2025-26 तक कुल 203 नए केंद्रीय विद्यालय कार्यशील हुए। इनमें 2014 में 11 तथा 2015-16 से 2025-26 के बीच 192 विद्यालय शामिल हैं। हालांकि 2025-26 के 34 विद्यालयों का आंकड़ा उस समय उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित है और 2026 में आगे भी नए विद्यालय स्वीकृत या शुरू हुए हो सकते हैं।

केंद्रीय विद्यालयों का उद्देश्य देशभर में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और अपेक्षाकृत समान शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद देश के प्रत्येक तहसील स्तर तक केंद्रीय विद्यालय की सुविधा पहुंचना अभी संभव नहीं हो पाया है। अनेक तहसीलों और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है।

यह स्थिति उस समय चर्चा का विषय बनती है जब केंद्र सरकार शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर रही है। 2014 के बाद अंतरिक्ष कार्यक्रमों में चंद्रयान और गगनयान जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी लगातार काम और सरकारी खर्च हुआ है। इन परियोजनाओं का वैज्ञानिक और रणनीतिक महत्व है, लेकिन इनके साथ यह सवाल भी उठता है कि बुनियादी शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं का विस्तार देश के प्रत्येक क्षेत्र तक कितनी तेजी से किया जा रहा है।

चंद्रयान और गगनयान जैसी परियोजनाओं पर होने वाले खर्च को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाना अलग विषय है, क्योंकि इन अभियानों का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करना है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण और छोटे कस्बों में स्कूलों की उपलब्धता, शिक्षकों की कमी तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे मुद्दे सीधे करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े हैं।

इसलिए बहस केवल इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि देश ने अंतरिक्ष क्षेत्र में कितनी बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि विकास की इन उपलब्धियों का लाभ शिक्षा के स्तर पर अंतिम व्यक्ति तक कब पहुंचेगा। 2014 से अब तक 203 नए केंद्रीय विद्यालयों का खुलना विस्तार की दिशा में एक कदम है, लेकिन हर तहसील तक ऐसी सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

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