नयी दिल्ली। कांग्रेस ने ई-20 ईंधन नीति को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इसे स्वच्छ ऊर्जा और तेल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताकर जल्दबाजी में पूरे देश में लागू किया जा रहा है लेकिन सच यह है कि इसके जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर पडऩे वाले प्रभावों का समग्र आकलन नहीं किया गया है।
कांग्रेस संचार विभाग की प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि भारत में एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, धान और मक्का जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलों से होता है, जबकि कई अन्य देश कृषि अवशेषों और अन्य जैविक अपशिष्ट से एथेनॉल तैयार करते हैं। गन्ना और धान देश के कुल सिंचाई जल का लगभग 70 प्रतिशत उपयोग करते हैं। एक लीटर गन्ना आधारित एथेनॉल के उत्पादन में लगभग 3,630 लीटर, चावल आधारित एथेनॉल में 10,790 लीटर तक और मक्का आधारित एथेनॉल में लगभग 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि देश के बड़े हिस्से में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। नीति आयोग के 2021 के एथेनॉल रोडमैप में भी अधिक टिकाऊ फीडस्टॉक अपनाने की आवश्यकता स्वीकार की गई थी, लेकिन इसके विपरीत केंद्र सरकार एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल के उपयोग को सब्सिडी दे रही है।
श्री रमेश ने दावा किया कि सरकार ने हाल ही में संसद में स्वीकार किया है कि एथेनॉल डिस्टिलरियों को अपने औसत खरीद मूल्य से लगभग 40 प्रतिशत कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।
कांग्रेस ने कहा कि वास्तव में ग्रीन ईंधन नीति वही होगी जो ईंधन को बढ़ावा देते हुए उसके पूरे पारिस्थितिकीय प्रभाव का भी आकलन करे। पार्टी का आरोप है कि ई20 को बढ़ावा देने के पीछे की प्रेरणा पर्यावरणीय नहीं है।
ई-20 सरकार की पर्यावरणीय प्राथमिकता नहीं : कांग्रेस
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