श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को मित्रता के रूप में पेश करते रहे हों, लेकिन ट्रंप प्रशासन की हालिया नीतियों ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब ट्रंप की एक नई धमकी ने भारत समेत उन देशों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 सितंबर को Truth Social पर कहा कि यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है तो अमेरिका उन देशों के साथ व्यापार रोक सकता है, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। ट्रंप ने अमेरिकी ब्याज दरों को दुनिया में सबसे कम रखने की जरूरत बताई और फेडरल रिजर्व पर दरें घटाने का दबाव बनाया।
ट्रंप की इस टिप्पणी का भारत के लिए महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि अमेरिका भारत के साथ वस्तु व्यापार में घाटे में है। ऐसे में यदि ट्रंप प्रशासन अपनी इस धमकी को वास्तविक व्यापार नीति में बदलता है तो भारत भी संभावित रूप से प्रभावित देशों में शामिल हो सकता है। हालांकि फिलहाल यह ट्रंप की राजनीतिक चेतावनी है, कोई लागू व्यापार प्रतिबंध नहीं।
चीन के साथ अमेरिकी संबंधों में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका आएंगे। यह यात्रा ट्रंप की चीन यात्रा के बाद हो रही है, जहां दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी और ट्रंप ने शी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया था। Reuters के अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और अन्य मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।
दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन की वीजा नीति भी चर्चा में है। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन ने ऐसे विदेशी नागरिकों के B1 और B2 वीजा रद्द करने की योजना सामने रखी थी, जिन्होंने अमेरिका में प्रवेश के बाद शरण के लिए आवेदन किया है या कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में संभावित रूप से करीब 2 लाख वीजा प्रभावित होने की बात कही गई है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि 2 लाख वीजा पहले ही रद्द किए जा चुके हैं या इनमें सबसे अधिक भारतीय नागरिक हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में कृषि और डेयरी बाजार तक पहुंच भी संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। फरवरी में घोषित अमेरिका-भारत व्यापार ढांचे में भारत ने कई अमेरिकी औद्योगिक, खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए शुल्क कम करने तथा बाजार पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई थी। हालांकि भारत सरकार ने गेहूं, चावल, मक्का और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसानों के हितों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है।
ऐसे में ट्रंप की ताजा व्यापार धमकी भारत के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस बयान को वास्तविक व्यापार प्रतिबंधों में बदलेगा या यह फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने के लिए दबाव बनाने की रणनीति तक सीमित रहेगा।








