अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मुस्लिम मुद्दा बना रहे कुछ रिपब्लिकन नेता
वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले मुस्लिम समुदाय और इस्लाम से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते जा रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, कुछ प्रमुख रिपब्लिकन नेता अपने चुनावी अभियानों में मुस्लिम उम्मीदवारों, इस्लाम और कथित कट्टरपंथ से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी से सीनेट उम्मीदवार अब्दुल एल-सईद को लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में तीखी टिप्पणी की। वेंस ने एल-सईद पर आतंकवाद का बचाव करने का आरोप लगाया। एल-सईद ने मार्च में डेट्रॉयट के उपनगर में एक यहूदी उपासना स्थल पर हुए हमले के बाद कुछ टिप्पणियां की थीं, जिन्हें लेकर विवाद हुआ। एल-सईद ने बाद में कहा कि उनकी बात को गलत समझा गया और उन्होंने माफी भी मांगी थी।
टेक्सास में रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट ने मुस्लिम नेतृत्व वाली एक प्रस्तावित विकास परियोजना को लेकर जांच की मांग की और वहां कथित तौर पर शरिया अदालतें स्थापित करने के प्रयास का आरोप लगाया। परियोजना के डेवलपर्स और नागरिक अधिकार संगठनों ने इन आरोपों पर आपत्ति जताई है। एबॉट के अभियान का कहना है कि कार्रवाई धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर है।
अलबामा में रिपब्लिकन सीनेटर और गवर्नर पद के उम्मीदवार टॉमी ट्यूबरविल ने भी “कट्टरपंथी इस्लाम” को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है। इसके अलावा, टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद कीथ सेल्फ और चिप रॉय ने “शरिया फ्री अमेरिका कॉकस” नाम से एक समूह बनाया है।
रॉयटर्स के मुताबिक, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अमेरिकी मुस्लिम समुदाय को अनुचित तरीके से निशाना बनाती है। वहीं रिपब्लिकन नेताओं का तर्क है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, कट्टरपंथ और सार्वजनिक जीवन में धर्म की भूमिका से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
अमेरिका में मुस्लिम आबादी करीब 55 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 1.6 प्रतिशत है। हाल के वर्षों में मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी भी बढ़ी है।








