सिंगापुर। सिंगापुर सरकार ने सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) की एयर इंडिया में हिस्सेदारी का बचाव किया है। परिवहन मंत्री जेफ्री सियो ने संसद में कहा कि सिंगापुर जैसे छोटे घरेलू बाजार वाली अर्थव्यवस्था में एयरलाइन के दीर्घकालिक विकास के लिए विदेशों में विस्तार करना जरूरी है।
रॉयटर्स के अनुसार, सिंगापुर एयरलाइंस के पास एयर इंडिया में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह हिस्सेदारी एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के बाद नवंबर 2024 में बनी थी। एयर इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर सिंगापुर में इस निवेश पर हाल के दिनों में राजनीतिक सवाल उठे हैं।
एयर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की नई पूंजी की मांग की है। इसी के बाद सिंगापुर में यह सवाल उठा कि क्या सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक के माध्यम से किसी तरह का सार्वजनिक धन एयर इंडिया में लगाया जा सकता है। हालांकि, मंत्री जेफ्री सियो ने स्पष्ट किया कि सिंगापुर एयरलाइंस अपने निवेशों को अपनी बैलेंस शीट और आंतरिक संसाधनों से वित्तपोषित करती है और उसने शेयरधारकों से अतिरिक्त पूंजी नहीं मांगी है।
सियो ने कहा कि एयर इंडिया को होने वाला नुकसान अपने आप सिंगापुर एयरलाइंस की देनदारी नहीं बन जाता और एयर इंडिया की पूंजी संबंधी मांग से SIA के लिए उसमें अतिरिक्त निवेश करना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि निवेश से मिलने वाला लाभ अंततः कंपनी और उसके शेयरधारकों को तय करना है।
सिंगापुर एयरलाइंस ने भी कहा है कि भारत में उसके निवेश आंतरिक संसाधनों से किए गए हैं और आगे भी बोर्ड की मंजूरी तथा निर्धारित पूंजी आवंटन व्यवस्था के तहत आंतरिक संसाधनों से ही किए जाएंगे। कंपनी ने एयर इंडिया के बदलाव की प्रक्रिया को दीर्घकालिक और कई वर्षों तक चलने वाला कार्यक्रम बताया है।
रॉयटर्स के अनुसार, एयर इंडिया समूह को मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में 2.33 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। इसके बावजूद सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया में अपने निवेश को भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार और अपनी बहु-केंद्रित वैश्विक रणनीति का हिस्सा बताया है।







