अमेरिका-कनाडा में नया टैरिफ वॉर, 50% शुल्क के जवाब में कनाडा का पलटवार
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर सोमवार को करेंगे ईरान का दौरा
तेहरान, 23 अगस्त (वार्ता) पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत करने तथा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत सोमवार को एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान का दौरा करेंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को इसकी जानकारी दी। ईरान सरकार ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि मुनीर की यात्रा के दौरान ईरान-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
पाकिस्तान फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों के तहत तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता कर रहा है। श्री मुनीर की यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ और कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी पर भी चर्चा होने की संभावना है।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका की ओर से अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की योजना को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसकी अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालने वाले अमेरिकी कदमों का वह जवाब देगा।
इस बीच, श्री बघाई ने नये अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें ईरान के खिलाफ वाशिंगटन के 'आर्थिक युद्ध' का विस्तार बताया।
उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों की अमेरिकी घोषणा किसी एक देश के विरुद्ध जारी 'गैरकानूनी आर्थिक युद्ध' से कहीं आगे की बात है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक स्वतंत्र सदस्य देश पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर अमेरिकी संप्रभुता थोपने का प्रयास है।
श्री बघाई ने कहा कि कोई भी देश विदेशी बैंकों, कंपनियों या हवाई अड्डों को किसी तीसरे देश के साथ वैध व्यापार छोड़ने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं कर सकता, क्योंकि वे अपने-अपने देशों के अधिकार क्षेत्र के अधीन हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के निकारागुआ मामले में दिये गये फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश को अपनी नीतियां बदलने के लिए आर्थिक दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ईरानी प्रवक्ता ने विदेशी बैंकों, कंपनियों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाले अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) में निहित संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।
श्री बघाई ने अमेरिकी प्रतिबंधों को समुद्री नाकेबंदी से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के कदम संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में देशों की संप्रभुता को कमजोर करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आर्थिक एवं सैन्य कार्रवाइयों को स्वीकार करना देशों के बैंकों, कंपनियों और हवाई अड्डों पर किसी विदेशी शक्ति के अधिकार को मान्यता देने जैसा होगा। उन्होंने इसे संप्रभुता पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के क्षरण और "पुराने औपनिवेशिक दौर की ओर वापसी" का रास्ता करार दिया।
कनाडा बिना अमेरिका का राज्य बने उसके फायदे चाहता है : ट्रंप
वाशिंगटन, 23 अगस्त (वार्ता) अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को अमेरिका का '51वां राज्य' बनाने की अपनी मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि कनाडा बिना अमेरिकी राज्य बने उसके फायदे हासिल करना चाहता है।
श्री ट्रंप ने वार्ता विफल होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "कनाडा एक राज्य होने के फायदे चाहता है, लेकिन राज्य बनना नहीं चाहता। उन्होंने कई वर्षों तक हमारे महान किसानों पर भारी शुल्क लगाए हैं। अब और नहीं।"
वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडा के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत नया शुल्क लागू कर दिया है।
श्री ट्रंप की यह टिप्पणी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता स्थगित किए जाने के बाद आई। कार्नी ने कहा था कि वाशिंगटन की ताजा मांगें "आर्थिक रूप से अव्यावहारिक" और "अनुचित" हैं तथा इनसे किसी भी संभावित समझौते के लाभ प्रभावित होते हैं।
श्री कार्नी ने कहा, "उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बहुत कम की पेशकश की।" उन्होंने अमेरिकी कदमों को कनाडा पर हमला बताते हुए नए शुल्कों को "गलत आकलन" करार दिया और कहा कि इनका उद्देश्य "हमें नुकसान पहुंचाना और बांटना" है।
अमेरिका ने 22 अगस्त से करीब 28 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इन शुल्कों के दायरे में कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का करीब 5.5 प्रतिशत हिस्सा आता है। प्रभावित उत्पादों में हॉकी स्टिक और सीमेंट समेत कई अन्य सामान शामिल हैं।
श्री कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों, किसानों, परिवारों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए 8 सितंबर से अमेरिकी शुल्क का "डॉलर के बदले डॉलर" जवाब देगा। हालांकि, जवाबी शुल्कों का विस्तृत स्वरूप अभी घोषित नहीं किया गया है।
श्री कार्नी के अनुसार, कनाडा इस्पात, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर लगाए गए अपने शेष जवाबी शुल्क हटाने को तैयार था, बशर्ते अमेरिका अपने शुल्कों में पर्याप्त कमी करता। कनाडा अन्य देशों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यापार समझौते करने की अपनी क्षमता पर किसी तरह का प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुष्टि की कि नए शुल्क 22 अगस्त से प्रभावी हो गये हैं। वार्ता के विफल होने से उत्तरी अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर तेज हो गया है और दोनों सरकारें आगे और जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रही हैं।
कनाडा बिना अमेरिका का राज्य बने उसके फायदे चाहता है : ट्रंप
वाशिंगटन, 23 अगस्त (वार्ता) अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को अमेरिका का '51वां राज्य' बनाने की अपनी मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि कनाडा बिना अमेरिकी राज्य बने उसके फायदे हासिल करना चाहता है।
श्री ट्रंप ने वार्ता विफल होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "कनाडा एक राज्य होने के फायदे चाहता है, लेकिन राज्य बनना नहीं चाहता। उन्होंने कई वर्षों तक हमारे महान किसानों पर भारी शुल्क लगाए हैं। अब और नहीं।"
वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडा के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत नया शुल्क लागू कर दिया है।
श्री ट्रंप की यह टिप्पणी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता स्थगित किए जाने के बाद आई। कार्नी ने कहा था कि वाशिंगटन की ताजा मांगें "आर्थिक रूप से अव्यावहारिक" और "अनुचित" हैं तथा इनसे किसी भी संभावित समझौते के लाभ प्रभावित होते हैं।
श्री कार्नी ने कहा, "उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बहुत कम की पेशकश की।" उन्होंने अमेरिकी कदमों को कनाडा पर हमला बताते हुए नए शुल्कों को "गलत आकलन" करार दिया और कहा कि इनका उद्देश्य "हमें नुकसान पहुंचाना और बांटना" है।
अमेरिका ने 22 अगस्त से करीब 28 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इन शुल्कों के दायरे में कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का करीब 5.5 प्रतिशत हिस्सा आता है। प्रभावित उत्पादों में हॉकी स्टिक और सीमेंट समेत कई अन्य सामान शामिल हैं।
श्री कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों, किसानों, परिवारों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए 8 सितंबर से अमेरिकी शुल्क का "डॉलर के बदले डॉलर" जवाब देगा। हालांकि, जवाबी शुल्कों का विस्तृत स्वरूप अभी घोषित नहीं किया गया है।
श्री कार्नी के अनुसार, कनाडा इस्पात, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर लगाए गए अपने शेष जवाबी शुल्क हटाने को तैयार था, बशर्ते अमेरिका अपने शुल्कों में पर्याप्त कमी करता। कनाडा अन्य देशों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यापार समझौते करने की अपनी क्षमता पर किसी तरह का प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुष्टि की कि नए शुल्क 22 अगस्त से प्रभावी हो गये हैं। वार्ता के विफल होने से उत्तरी अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर तेज हो गया है और दोनों सरकारें आगे और जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रही हैं।
USMCA के भविष्य पर बढ़ी अनिश्चितता, अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता पर संकट
वॉशिंगटन/ओटावा, 23 अगस्त 2026: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौते) के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद ने पहले से चल रही व्यापार समीक्षा को और मुश्किल बना दिया है।
अमेरिका ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है। कनाडा ने इसके जवाब में 8 सितंबर से अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा तनाव से कंपनियों के लिए भविष्य की व्यापार नीतियों का अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। खासकर ऑटोमोबाइल, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में लंबी अवधि के निवेश और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि USMCA में व्यापक बदलावों पर बातचीत आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन मौजूदा टैरिफ विवाद ने दोनों देशों के बीच भरोसे को कमजोर किया है। इसलिए आने वाले महीनों में व्यापार समझौते को बनाए रखने, बदलने या नए समझौते की दिशा में जाने को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
मुख्य बात: USMCA अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका-कनाडा के बीच बढ़ते टैरिफ और वार्ता के टूटने से इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है





