वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मेल-इन बैलेट के नियमों को सख्त करने की कोशिश में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसने ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को लागू करने से रोक रखा था। हालांकि, इस फैसले के बावजूद एक दूसरी राष्ट्रव्यापी अदालती रोक अभी प्रभावी है। इसलिए ट्रंप प्रशासन को मिली राहत को मेल-बैलट नीति पर अंतिम जीत नहीं माना जा रहा है।
नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन ने डाक से मतदान की व्यवस्था में बड़े बदलाव की कोशिश की है। मार्च में जारी कार्यकारी आदेश में संघीय एजेंसियों को मतदाता पात्रता की जांच और मेल-बैलट वितरण से जुड़े नियमों को कड़ा करने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन का तर्क है कि इससे चुनाव प्रक्रिया में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
23 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी ने ट्रंप के आदेश को अदालत में चुनौती दी है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए राज्यों द्वारा संचालित चुनाव प्रक्रिया में इस तरह का व्यापक संघीय हस्तक्षेप अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस मामले में बोस्टन की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ रोक लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से ट्रंप प्रशासन को उस रोक से फिलहाल राहत मिल गई है। इससे प्रशासन को अपने आदेश को आगे बढ़ाने की कानूनी गुंजाइश मिली है। हालांकि अदालत ने मेल-बैलट संबंधी पूरे कार्यकारी आदेश की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
एक और अदालती रोक बनी हुई
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक दूसरी राष्ट्रव्यापी अदालती रोक अभी भी प्रभावी है। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद भी ट्रंप प्रशासन के लिए अपने मेल-बैलट आदेश को पूरी तरह लागू करने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। आगे की कानूनी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
ट्रंप लंबे समय से मेल-इन वोटिंग के नियमों को कड़ा करने की मांग करते रहे हैं। उनके प्रशासन ने मार्च में जारी आदेश के जरिए संघीय स्तर पर मतदाता पात्रता की पुष्टि और डाक मतपत्रों के वितरण से संबंधित व्यवस्था में बदलाव की पहल की थी। विपक्षी दल और मतदान अधिकार संगठनों का आरोप है कि इससे वैध मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
मध्यावधि चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले मेल-बैलट का मुद्दा तेजी से राजनीतिक और कानूनी विवाद का केंद्र बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से ट्रंप प्रशासन को रणनीतिक बढ़त जरूर मिली है, लेकिन राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों की ओर से कानूनी चुनौती जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल तस्वीर साफ है—सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ लगी एक बड़ी न्यायिक रोक को स्थगित किया है, लेकिन मेल-बैलट पर पूरी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में निचली अदालतों और सुप्रीम कोर्ट के आगे के फैसले यह तय करेंगे कि ट्रंप का आदेश वास्तव में किस हद तक लागू हो पाता है।








