श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पत्रकारों से सीधे सवाल-जवाब को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार विवाद जून 2026 में फ्रांस में हुए जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से जुड़ा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मीडिया से दूरी बनाने का आरोप लगाया है।
सर्जियो गोर ने बताया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले भारतीय पक्ष की ओर से यह अनुरोध किया गया था कि दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान मीडिया को सवाल पूछने का अवसर नहीं दिया जाए। गोर के अनुसार, उन्होंने इस बात की जानकारी ट्रंप को दी थी। हालांकि, बाद में ट्रंप ने पत्रकारों की ओर रुख करते हुए उनसे सवाल पूछने के लिए कहा।
सरकार की ओर से भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि उच्चस्तरीय विदेशी दौरों के दौरान नेताओं की बैठकों और मीडिया की मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पहले से चर्चा होना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा, समय और प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए मीडिया व्यवस्था तय की जाती है।
मोदी के प्रेस वार्ता से दूरी का पुराना मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पत्रकारों के साथ खुले सवाल-जवाब को लेकर चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे थे, लेकिन पत्रकारों के सवालों का जवाब उन्होंने स्वयं नहीं दिया था। इसके बाद से विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि प्रधानमंत्री स्वतंत्र प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते।
मोदी सरकार के समर्थकों का तर्क रहा है कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक कार्यक्रमों, संसद, विदेशी नेताओं के साथ संयुक्त कार्यक्रमों और विभिन्न माध्यमों से अपनी बात रखते हैं। उनका कहना है कि किसी विशेष प्रारूप में प्रेस कॉन्फ्रेंस न करना अपने आप में प्रेस से दूरी का प्रमाण नहीं है।
यूरोप यात्रा के दौरान भी उठा था सवाल
प्रधानमंत्री मोदी की पत्रकारों से दूरी को लेकर मई 2026 में उनकी यूरोप यात्रा के दौरान भी विवाद हुआ था। नॉर्वे में एक पत्रकार ने प्रधानमंत्री से सवाल किया था कि वे पत्रकारों के सवालों का सामना क्यों नहीं करते। इस दौरान मोदी ने सवाल का जवाब नहीं दिया और वहां से आगे बढ़ गए। इस घटना के बाद भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और प्रधानमंत्री की मीडिया नीति को लेकर बहस फिर तेज हुई थी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
सर्जियो गोर के बयान को कांग्रेस ने अपने एक्स खाते पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री की मीडिया नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रधानमंत्री को पत्रकारों के सीधे सवालों से दूर रखने का प्रयास करती है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री और सरकार से स्वतंत्र पत्रकारों द्वारा सवाल पूछना जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कांग्रेस इसी आधार पर मोदी के नियमित और स्वतंत्र प्रेस संवाद की मांग करती रही है।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकार की ओर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उच्चस्तरीय बैठकों में मीडिया की मौजूदगी से संबंधित व्यवस्थाएं पहले से तय होती हैं। किसी बैठक में पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति दी जाएगी या नहीं, यह कार्यक्रम के स्वरूप और दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करता है।
ऐसे में जी 7 सम्मेलन की घटना को लेकर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने हैं। विपक्ष इसे प्रधानमंत्री को पत्रकारों के सवालों से बचाने की नीति के उदाहरण के रूप में देख रहा है, जबकि सरकार इसे उच्चस्तरीय बैठकों की सामान्य व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जोडक़र देख रही है।
फिलहाल सर्जियो गोर का बयान इस पुराने विवाद को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।
पीएम मोदी का ‘प्रेस से दूरी’ विवाद फिर चर्चा में, जी-7 मुलाकात को लेकर सर्जियो गोर के बयान पर सियासत तेज
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