मुंबई। अडानी समूह से जुड़े विदेशी निवेशकों के खिलाफ चल रही नियामकीय जांच के बीच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कम से कम तीन मॉरीशस स्थित फंडों के सेटलमेंट आवेदन खारिज कर दिए हैं। ये आवेदन शेयरधारकों से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं करने सहित कथित नियामकीय उल्लंघनों के मामलों को निपटाने के लिए दाखिल किए गए थे। मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इन फंडों के पास अडानी समूह की कंपनियों में निवेश है। सेटलमेंट आवेदन खारिज किए जाने के बाद इन मामलों में SEBI की नियामकीय कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। हालांकि, आवेदन खारिज होना अपने आप में अडानी समूह या संबंधित फंडों को किसी अंतिम अपराध का दोषी ठहराने वाला फैसला नहीं है।
13 विदेशी निवेशक जांच के घेरे में
अडानी समूह से जुड़े कुल 13 विदेशी निवेशक SEBI की जांच के दायरे में हैं। यह जांच 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर Hindenburg Research की रिपोर्ट के बाद तेज हुई थी। Hindenburg ने अडानी समूह पर offshore entities और tax havens के कथित अनुचित इस्तेमाल सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे।
अडानी समूह ने Hindenburg के आरोपों को लगातार खारिज किया है और किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इनकार किया है। समूह का कहना रहा है कि उसकी कंपनियों ने सभी लागू कानूनों और नियामकीय नियमों का पालन किया है।
शेयरधारकों की जानकारी का मुद्दा
जांच के केंद्र में विदेशी फंडों द्वारा अडानी समूह की कंपनियों में रखी गई हिस्सेदारी और संबंधित beneficial ownership की जानकारी है। नियामकीय नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और उससे जुड़े निवेशकों की जानकारी का खुलासा करना जरूरी होता है।
Reuters के अनुसार, SEBI ने कुछ मामलों को settlement के जरिए निपटाने के लिए फंडों के सामने शर्तें रखी थीं। इनमें शेयरधारकों की पहचान से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना और संभावित आर्थिक दंड जैसे मुद्दे शामिल थे। कम से कम तीन मॉरीशस स्थित फंड इन मामलों को settlement के जरिए समाप्त करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके आवेदन पिछले सप्ताह खारिज कर दिए गए।
अब आगे बढ़ सकती है कार्रवाई
Settlement आवेदन खारिज होने के बाद संबंधित मामलों में SEBI की enforcement प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। नियामक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आर्थिक दंड या अन्य नियामकीय कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, इस घटनाक्रम को अडानी समूह के खिलाफ अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी। मौजूदा मामला मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों के नियामकीय अनुपालन और disclosure से जुड़ा है। जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकरण के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही आरोपों की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
2023 के बाद बदली तस्वीर
Hindenburg Research की रिपोर्ट जनवरी 2023 में सामने आने के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। रिपोर्ट ने समूह की कारोबारी संरचना, विदेशी कंपनियों और शेयरों के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठाए थे। अडानी समूह ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए आरोपों को निराधार बताया था।
इसके बाद समूह ने निवेशकों का भरोसा बहाल करने और नियामकीय सवालों का जवाब देने के लिए कई कदम उठाए। समूह की कई कंपनियों के शेयरों में बाद में सुधार भी देखने को मिला।
फिलहाल SEBI की जांच और विदेशी फंडों से जुड़े settlement मामलों पर बाजार की नजर बनी हुई है। कम से कम तीन मॉरीशस फंडों के आवेदन खारिज होने से यह संकेत जरूर मिलता है कि नियामक इन मामलों को हल्के में लेने के बजाय disclosure और beneficial ownership से जुड़े नियमों के अनुपालन पर सख्त रुख अपना रहा है।







