काठमांडू, 30 अगस्त। नेपाल और चीन के अधिकारियों ने विनाशकारी आपदा से करीब तीन महीने पहले काठमांडू में बैठक कर बाढ़, मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर चर्चा की थी। 27 मई को हुई इस बैठक में दोनों देशों के करीब दो दर्जन अधिकारी शामिल हुए थे।
बैठक में बाढ़, मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों की निगरानी तथा आपदा की स्थिति में बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। ग्लेशियल झीलों की निगरानी और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
इसके बाद नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में पानी, कीचड़ और चट्टानों के भारी बहाव से बड़ी तबाही हुई। इस घटना में सैकड़ों लोगों के मारे जाने और कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई।
Reuters के अनुसार, नेपाली अधिकारियों ने बाद में ग्लेशियर और जलस्तर से जुड़ी पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने की चिंता जताई। हालांकि चीन ने समय पर महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा नहीं करने के आरोपों को खारिज किया है।
इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी, मौसम और ग्लेशियरों की निगरानी तथा नेपाल-चीन के बीच आपदा संबंधी सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।







