नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने सोना-चांदी बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। बुधवार, 2 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर तक पहुंच गया। हाजिर सोना शुरुआती कारोबार में 4,304.01 डॉलर प्रति औंस तक गिरा और बाद में करीब 4,323.59 डॉलर प्रति औंस पर रहा। चांदी में भी कमजोरी दर्ज की गई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 0.3 प्रतिशत नीचे रही।
भारतीय बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में 2 सितंबर को 24 कैरेट सोने का खुदरा भाव करीब 1,54,230 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज तथा अन्य शुल्क के कारण वास्तविक खरीद मूल्य में अंतर हो सकता है।
चांदी की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। उपलब्ध भारतीय खुदरा दरों के अनुसार 2 सितंबर को चांदी का भाव करीब 245 रुपये प्रति ग्राम यानी 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। हालांकि शहर और कारोबारी के अनुसार खुदरा भाव अलग हो सकते हैं।
सोना-चांदी में गिरावट के पीछे मध्य पूर्व का तनाव एक महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल की कीमतें बढऩे से महंगाई की चिंता गहराई है। इसके साथ अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बाजार में यह संभावना बढ़ी है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
बाजार में अब नजर अमेरिकी रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों पर टिकी है। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर संकेत दे सकते हैं। यदि महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत बनी रहती है तो सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं मध्य पूर्व में तनाव कम या ज्यादा होने का सीधा असर तेल, डॉलर और कीमती धातुओं के बाजार पर भी पड़ सकता है।







