नई दिल्ली, 3 सितंबर। भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 7.1 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक है। निवेश, विनिर्माण और मजबूत घरेलू मांग ने विकास दर को सहारा दिया। हालांकि, उम्मीद से बेहतर आंकड़ों के सामने आने के बाद GDP की गणना और आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर बहस शुरू हो गई है।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सवाल उठाया है कि पिछले साल की तुलना के लिए इस्तेमाल किए गए GDP आधार में बड़े संशोधन के कारण इस साल की वृद्धि दर वास्तविक स्थिति से अधिक मजबूत दिखाई दे सकती है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी सवाल किया कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है तो इसका असर रोजगार, घरेलू निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश जैसे क्षेत्रों में उतनी मजबूती से क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
GDP आंकड़ों पर एक और बहस ‘डिफ्लेटर’ को लेकर है। Reuters के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में GDP डिफ्लेटर करीब 2.3 प्रतिशत रहा, जो खुदरा और थोक महंगाई दर से काफी कम है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कम डिफ्लेटर वास्तविक आर्थिक वृद्धि को लेकर सवाल खड़े करता है, जबकि अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन और इनपुट कीमतों को अलग-अलग समायोजित करने वाली नई पद्धति के कारण ऐसा अंतर संभव है।
सरकार ने GDP आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा है कि फरवरी 2026 में लागू की गई नई GDP श्रृंखला में आधार वर्ष को 2022-23 किया गया है और अधिक विस्तृत डेटा तथा नए Producer Price Index का इस्तेमाल किया गया है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, नई पद्धति में 300 से अधिक डिफ्लेटर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जबकि पुरानी प्रणाली में करीब 180 डिफ्लेटर थे। सरकार का कहना है कि पुरानी और नई GDP श्रृंखला के आंकड़ों की सीधे तुलना करना उचित नहीं है।
इसके बावजूद, कई संकेतक भारतीय अर्थव्यवस्था में वास्तविक मजबूती की ओर इशारा करते हैं। Reuters के मुताबिक अगस्त में वाहन बिक्री में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई, बैंक क्रेडिट करीब एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंचा और अप्रैल-अगस्त के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि, Purchasing Managers’ Index जैसे कुछ सर्वे आधारित संकेतकों में कमजोरी भी देखी गई है।
निष्कर्ष यह है कि 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि का आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल सरकार का वैध और प्रकाशित अनुमान है, लेकिन इसके पीछे इस्तेमाल की गई नई पद्धति, पिछले आंकड़ों में संशोधन और कम GDP डिफ्लेटर को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों के बीच गंभीर चर्चा चल रही है। इसे सीधे तौर पर “GDP आंकड़े गलत हैं” कहना अभी उचित नहीं होगा; मुद्दा मुख्यतः आंकड़ों की पद्धति और उनकी व्याख्या को लेकर है।







