सादुलशहर। सादुलशहर नगरपालिका चुनाव के परिणामों ने स्थानीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। 25 वार्डों में से 22 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत के बाद पूर्व भाजपा निर्वाचित अध्यक्ष प्रदीप खीचड़ का राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव परिणाम आने के बाद खीचड़ को जयपुर से फोन आने और उनके जयपुर रवाना होने की खबर है।
प्रदीप खीचड़ इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय रहे। उनके समर्थन वाले 22 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। दूसरी ओर भाजपा के 25 प्रत्याशियों में से 23 को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के भी 24 प्रत्याशी चुनाव हार गए। परिणाम के अनुसार भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि 22 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।
परिणाम के बाद खीचड़ ने कहा कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ प्रचार नहीं किया और वे आज भी मन से भाजपाई हैं। इसके बाद शाम को जयपुर से उनके पास फोन आने और तत्काल जयपुर रवाना होने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रदीप खीचड़ की पत्नी को भाजपा का सिम्बल दिया जा सकता है और उनके समर्थक निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो नगरपालिका में भाजपा के पक्ष में सभापति पद का रास्ता साफ होने की संभावना जताई जा रही है और निर्विरोध निर्वाचन के समीकरण भी बन सकते हैं। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा सामने आना बाकी है।
सादुलशहर की राजनीति में बढ़ा खीचड़ का प्रभाव
चुनाव परिणाम के बाद प्रदीप खीचड़ को सादुलशहर की राजनीति में प्रभावशाली रणनीतिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों की संख्या में हुए इजाफे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ थाने पहुंच गए।
बताया जा रहा है कि उनके समर्थकों ने पुलिस थाने का घेराव किया। इसके बाद एडीशनल एसपी दीपक शर्मा के साथ खीचड़ की वार्ता हुई।
मारपीट मामले में कार्रवाई की मांग
बताया गया कि 11 मार्च को वार्ड नंबर 5 में मतदान स्थल के पास प्रदीप खीचड़ के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में उनके द्वारा एफआईआर दर्ज करवाए जाने की बात कही गई है। खीचड़ ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एडीशनल एसपी के समक्ष अपनी बात रखी।
उन्होंने थानाधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाने तथा विधायक के गनमैन को निलंबित करने की मांग भी रखी। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार पुलिस की ओर से उनकी मांगों पर सहमति जताई गई है। सूत्र का दावा है कि आचार संहिता हटने के बाद थानाधिकारी का औपचारिक तबादला किया जा सकता है और गनमैन के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि थानाधिकारी के तबादले और गनमैन के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
अब नजर जयपुर से होने वाले फैसले पर
सादुलशहर नगरपालिका चुनाव के परिणामों ने प्रदीप खीचड़ को एक बार फिर स्थानीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। 22 निर्दलीय पार्षदों की जीत के बाद उनके राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। अब सभी की निगाहें जयपुर में होने वाली राजनीतिक बातचीत और भाजपा की ओर से लिए जाने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं।








