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Tuesday, September 15, 2026
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बर्बादी से पहले आखिरी मौका : ट्रंप

श्री ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक प्रगति के संकेतों और क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ एक बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान को रोक दिया था, लेकिन चेतावनी दी कि समझौते का मौका तेजी से खत्म हो रहा है। श्री ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि शायद हमें कुछ हासिल हो जाए, लेकिन मैं उन्हें बर्बादी से पहले हर आखिरी मौका देना चाहता हूं। यह ईरान के लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है।

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प्रकाशित: 4 Aug 2026, 12:57 PMअपडेट: 4 Aug 2026, 12:57 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास परमाणु समझौते को स्वीकार करने का एक आखिरी मौका है, वरना उसे बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस हमले को रोक दिया था जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला हो सकता था, ताकि कूटनीति को एक आखिरी मौका दिया जा सके।
व्हाइट हाउस में बोलते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय ताकतों के अनुरोध पर तेहरान के साथ बातचीत चल रही है, जबकि ईरान ने वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है। इससे अमेरिका-ईरान कूटनीति की स्थिति को लेकर गहरी अनिश्चितता पैदा हो गई है और नए सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई समाधान निकलेगा या सैन्य टकराव होगा।
श्री ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक प्रगति के संकेतों और क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ एक बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान को रोक दिया था, लेकिन चेतावनी दी कि समझौते का मौका तेजी से खत्म हो रहा है।
श्री ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि शायद हमें कुछ हासिल हो जाए, लेकिन मैं उन्हें बर्बादी से पहले हर आखिरी मौका देना चाहता हूं। यह ईरान के लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है।

श्री ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी चल रही है और यह बातचीत ईरान के साथ-साथ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के कहने पर हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने उन हमलों को रोक दिया जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला हो सकते थे, क्योंकि कूटनीति से समाधान की उम्मीद बढ़ रही थी।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को राष्ट्रपति के इस दावे का खंडन करते हुये कहा कि वाशिंगटन के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। मंत्रालय ने कहा कि अभी उनकी बातचीत सिर्फ़ ओमान के साथ हो रही है, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा के अस्थायी इंतज़ाम को लेकर है।
इस सार्वजनिक खंडन से श्री ट्रंप की हालिया कूटनीतिक कोशिशों को लेकर बनी गहरी अनिश्चितता सामने आ गई। एक तरफ़ वाशिंगटन बातचीत जारी होने की बात कह रहा था, तो दूसरी तरफ़ तेहरान ने ऐसी किसी बातचीत के होने से ही इनकार कर दिया।
ईरान की बातों का जवाब देते हुए श्री ट्रंप ने वहां के नेतृत्व पर बेहद दोमुंहेपन का आरोप लगाया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए उनके बयानों को हमेशा की तरह बकवास कहकर खारिज कर दिया।
हाल की बातचीत से पता चलता है कि तेहरान के साथ परमाणु समझौते को फिर से शुरू करने की कोशिश में श्री ट्रंप सैन्य दबाव और कूटनीति के प्रस्तावों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार समय-सीमा तय की है और सैन्य नतीजों की चेतावनी दी है, लेकिन प्रतिबंधों में ढील, यूरेनियम संवर्धन और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत के पिछले दौर अटके हुए हैं।
इस गतिरोध के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह संकरा जलमार्ग दुनिया भर में होने वाले तेल के शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए कोई भी खतरा ऊर्जा बाजारों और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ा जोखिम है।

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