हनुमानगढ़। नगर परिषद चुनाव परिणामों ने हनुमानगढ़ की राजनीति में एक बार फिर निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल का प्रभाव साबित किया है। नगर परिषद के 60 वार्डों में से 34 वार्डों में बंसल समर्थित निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा के 15, कांग्रेस के 10 और एक अन्य प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
चुनाव परिणाम के बाद निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के समर्थक पार्षदों का आंकड़ा बहुमत से काफी आगे पहुंच गया है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से नगर परिषद में बोर्ड बनाने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
बंसल की पत्नी को नहीं मिली जीत
नगर परिषद चुनाव में गणेशराज बंसल की पत्नी भी चुनाव मैदान में थीं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल सकी। इसके बाद अब चेयरपर्सन पद के लिए बंसल समर्थक महिला निर्दलीय पार्षदों में से किसी एक के नाम पर विचार किए जाने की संभावना है। 34 निर्दलीय पार्षदों में यदि कोई महिला पार्षद चेयरपर्सन पद के लिए चुनी जाती हैं तो बंसल गुट का बोर्ड बनने की स्थिति मजबूत हो जाएगी।
भाजपा-कांग्रेस को पीछे छोड़ा
हनुमानगढ़ के चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि मतदाताओं ने भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में समर्थन दिया। 60 वार्डों में 34 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए स्थानीय स्तर पर चुनौती खड़ी कर दी है।
भाजपा को 15 और कांग्रेस को 10 सीटें मिलने के बावजूद दोनों दल बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गए। इसके विपरीत बंसल समर्थित निर्दलीयों ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।
गणेशराज बंसल का बढ़ता प्रभाव
निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के लिए यह चुनाव परिणाम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के रूप में जीत हासिल करने के बाद नगर परिषद चुनाव में भी उनके समर्थकों की बड़ी संख्या में जीत ने हनुमानगढ़ की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ का संकेत दिया है।
भाजपा और कांग्रेस जैसे स्थापित राजनीतिक दलों के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान कायम करने वाले बंसल अब नगर परिषद में भी अपने समर्थकों के जरिए बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं। चुनाव परिणाम के बाद स्थानीय राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अब नजर चेयरपर्सन के चुनाव पर
34 निर्दलीय पार्षदों के साथ गणेशराज बंसल गुट के पास बोर्ड गठन के लिए मजबूत स्थिति है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि चेयरपर्सन पद के लिए किस महिला पार्षद के नाम पर सहमति बनती है। यदि बंसल समर्थक पार्षद एकजुट रहते हैं तो हनुमानगढ़ नगर परिषद में निर्दलीयों का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा सकता है।
हालांकि अंतिम तस्वीर चेयरपर्सन चुनाव और पार्षदों के आधिकारिक समर्थन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।








