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Tuesday, September 15, 2026
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ट्रंप का बड़ा दावा: वेनेजुएला के साथ हुआ ‘दुनिया का सबसे बड़ा तेल सौदा’

प्रकाशित: 29 Aug 2026, 9:56 PMअपडेट: 29 Aug 2026, 9:57 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ दुनिया का सबसे बड़ा तेल सौदा किया है। ट्रंप ने इसकी घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर करते हुए कहा कि यह समझौता उनकी सरकार के निर्देश पर किया गया है।

ट्रंप के अनुसार, इस समझौते को विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि समझौते का उद्देश्य वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों को विकसित करना और अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से अमेरिकी करदाताओं पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

हालांकि, समझौते की पूरी शर्तें और वित्तीय ढांचा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए 65 अरब बैरल के भंडार पर “बहुमत नियंत्रण” और अमेरिकी करदाताओं पर कोई बोझ नहीं पड़ने जैसे दावों को फिलहाल ट्रंप के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चा तेल भंडार है, जो करीब 303 अरब बैरल बताया जाता है। इसके बावजूद देश का तेल उत्पादन लंबे समय से कमजोर बुनियादी ढांचे, निवेश की कमी और अन्य आर्थिक समस्याओं से प्रभावित रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में निजी क्षेत्र की कंपनियों को वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। इससे लंबे समय से कमजोर पड़े तेल उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।

ट्रंप प्रशासन इस समझौते को अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और विदेशी तेल आपूर्ति पर निर्भरता कम करने की अपनी व्यापक नीति का हिस्सा मान रहा है। ट्रंप पहले भी अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और तेल-गैस क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर देते रहे हैं।

हालांकि, समझौते की वास्तविक आर्थिक और रणनीतिक अहमियत आने वाले समय में इसकी विस्तृत शर्तें सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इसे ट्रंप द्वारा घोषित एक बड़े ऊर्जा समझौते के रूप में देखा जा रहा है, जबकि 65 अरब बैरल के भंडार पर नियंत्रण संबंधी दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों का इंतजार है।

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