मुंबई। भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं में शामिल एचडीएफसी बैंक ने शनिवार को बताया कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन ने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं करने का फैसला किया है। उनका कार्यकाल अक्टूबर के अंत में समाप्त होने वाला है।
जगदीशन से पहले उम्मीद की जा रही थी कि वह एचडीएफसी बैंक के सीईओ के तौर पर तीसरे कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। उनके इस फैसले के बाद बैंक के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और निवेशकों की नजर अब नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया पर है।
एचडीएफसी बैंक में यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर पहले सवाल उठ चुके हैं। बैंक के पूर्व चेयरमैन के अचानक पद छोड़ने के बाद निवेशकों के बीच बैंक के संचालन और नेतृत्व को लेकर कुछ चिंताएं सामने आई थीं।
हालांकि, जून 2026 में कराई गई एक स्वतंत्र बाहरी समीक्षा में पूर्व चेयरमैन द्वारा उठाए गए कथित शासन संबंधी मुद्दों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। इस समीक्षा के निष्कर्ष से बैंक को लेकर उठी कुछ चिंताओं को दूर करने में मदद मिली थी।
शशिधर जगदीशन लंबे समय से एचडीएफसी बैंक के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे हैं। उनके कार्यकाल में बैंक ने डिजिटल बैंकिंग, कारोबार के विस्तार और एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद एकीकरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया।
अब एचडीएफसी बैंक के सामने नए सीईओ के चयन की महत्वपूर्ण चुनौती है। जगदीशन के अक्टूबर में कार्यकाल पूरा करने के बाद बैंक का नेतृत्व किसके हाथों में होगा, इस पर बाजार और निवेशकों की नजर बनी रहेगी। नए नेतृत्व की नियुक्ति बैंक की आगे की रणनीति और कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।







