वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। रविवार को अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के लराक द्वीप पर दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका के अनुसार ईरानी रिवोल्यूशनरी गाड्र्स इन लॉन्चरों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे। यह जुलाई के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली ज्ञात सीधी सैन्य कार्रवाई थी।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरान के रिवोल्यूशनरी गाड्र्स के अनुसार उसने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी ठिकानों—किंग हुसैन और अल अज्रक—को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। जॉर्डन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में आने वाली मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि तेहरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि खार्ग द्वीप को तबाह किया जा रहा है, लेकिन रॉयटर के अनुसार इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खार्ग ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है और युद्ध की शुरुआत से पहले ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से संभाला जाता था।
सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और युद्ध शुरू होने से पहले वैश्विक तेल प्रवाह का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता था। हालिया तनाव के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या बेहद कम हो गई है। एक टैंकर के रास्ते में प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने की भी जानकारी सामने आई है।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढऩे का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत बढक़र 89.87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.74 प्रतिशत बढक़र 84.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। बाद की ट्रेडिंग में ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर भी चला गया।
इस संघर्ष का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक सामान्य नहीं होता है तो तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
दूसरी तरफ कूटनीतिक स्तर पर भी रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। मध्यस्थ देश होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाजरानी बहाल कराने और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि रॉयटर के अनुसार वार्ता फिलहाल गतिरोध में है और नए अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावना भी बनी हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि ईरान पर नए सेकेंडरी प्रतिबंध साप्ताहिक आधार पर लगाए जा सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लराक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई और ईरान के जवाबी हमले के बाद संघर्ष सीमित रहेगा या फिर इसका दायरा और बढ़ेगा। होर्मुज में किसी बड़े सैन्य घटनाक्रम से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिकी अगली कार्रवाई, ईरान के जवाब और जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर टिकी है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष छठे महीने में, होर्मुज पर बढ़ा तनाव
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