वॉशिंगटन/रियाद। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि संभावित समझौते को अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल रोक दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निकट भविष्य में समझौता होता है तो यह कदम क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि दुनिया के भविष्य और एक सफल एवं समृद्ध ईरान की संभावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हमले को रद्द करने पर सहमति दी है, बशर्ते जल्द ही कोई समझौता हो सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस रुख का इज़रायल भी समर्थन कर रहा है।
इस बीच, शनिवार को ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने ईरान पर संभावित बड़े अमेरिकी हमले को लेकर चिंता जताई और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सैन्य कार्रवाई से बचने का आग्रह किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के प्रयास भी तेज हो गए हैं। कतर के प्रतिनिधियों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा ओमान के अधिकारियों के साथ अलग-अलग दौर की वार्ताएं कीं। सूत्रों का कहना है कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इससे क्षेत्रीय तनाव में कितनी कमी आएगी।
उधर, ईरानी मीडिया के अनुसार विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी बातचीत की। इस दौरान ईरान ने पश्चिम एशिया के देशों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने ईरान के खिलाफ किसी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में सहयोग किया तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी उन्हें उठानी होगी।
इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिका और इज़रायल ईरान की ऊर्जा अवसंरचना पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, ट्रंप ने 8 जुलाई को घोषणा की थी कि 18 जून की रात घोषित युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर कई हमले किए, जिन्हें अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर कथित हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।
इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। तेहरान ने वाशिंगटन पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका की कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों पक्षों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है।











