एस्टोनिया की संसद ने मानवाधिकार लोकपाल उले मदीसे को चुना अगला राष्ट्रपति
तालिन। एस्टोनिया की संसद ने संवैधानिक कानून विशेषज्ञ और वर्तमान मानवाधिकार लोकपाल उले मदीसे को देश का अगला राष्ट्रपति चुन लिया है। 2 सितंबर को हुए गुप्त मतदान में मदीसे को 71 वोट मिले। राष्ट्रपति चुने जाने के लिए संसद के 101 सदस्यों में से कम से कम 68 वोटों की जरूरत थी। मतदान में 78 सांसदों ने हिस्सा लिया और सात मतपत्र खाली रहे।
51 वर्षीय मदीसे वर्ष 2015 से एस्टोनिया की चांसलर ऑफ जस्टिस हैं। यह पद नागरिकों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा तथा सरकारी संस्थाओं की गतिविधियों की संवैधानिक निगरानी से जुड़ा है। वह संवैधानिक कानून की विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी रही हैं।
मदीसे का नाम 75 सांसदों ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित किया था और वह चुनाव में अकेली उम्मीदवार थीं, क्योंकि किसी अन्य उम्मीदवार को नामांकन के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन नहीं मिल सका। वह वर्तमान राष्ट्रपति अलार कारिस का स्थान लेंगी, जिन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। मदीसे का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा और वह 12 अक्टूबर को पद की शपथ लेंगी।
एस्टोनिया में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक भूमिका वाला है, जबकि देश की रोजमर्रा की सरकार प्रधानमंत्री और संसद के नेतृत्व में चलती है। रूस की सीमा से लगे एस्टोनिया की सुरक्षा नीति में नाटो और यूरोपीय संघ की भूमिका महत्वपूर्ण है। देश यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में शामिल है और हाल के वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है।
मदीसे एस्टोनिया की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी। उनके सामने संवैधानिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और यूरोपीय सहयोग से जुड़े मुद्दों के बीच राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियां निभाने की चुनौती होगी।








