चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हालांकि अभी गठबंधन को अंतिम रूप दिए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके उलट भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने अपने हालिया पंजाब दौरे के दौरान पार्टी के 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लडऩे की रणनीति सार्वजनिक रूप से दोहराई है।
बीएल संतोष ने 24 और 25 अगस्त को पंजाब का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान पटियाला और बठिंडा के अलावा लुधियाना, जालंधर तथा अमृतसर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की गईं। इन बैठकों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को सभी 117 सीटों पर तैयार करने पर जोर दिया गया।
भाजपा की ओर से सार्वजनिक रूप से लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि पार्टी पंजाब में अपने दम पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। संतोष ने कहा कि भाजपा सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और राज्य में सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए अकेले चुनाव लडऩे की बात कही है।
इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित समझौते की अटकलें खत्म नहीं हुई हैं। 26 अगस्त की रिपोर्टों के मुताबिक दोनों दलों के स्तर पर गठबंधन को लेकर बातचीत और संभावनाओं पर चर्चा जारी रहने के संकेत हैं। ऐसे में भाजपा का सार्वजनिक रूप से अकेले चुनाव लडऩे की तैयारी करना और दूसरी ओर गठबंधन की चर्चाओं का जारी रहना पंजाब की राजनीति में दोहरे संकेत पैदा कर रहा है।
सीटों के बंटवारे को लेकर 70 से अधिक सीटें भाजपा और 40 से अधिक सीटें अकाली दल को मिलने का दावा भी सामने आया है, लेकिन इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संभावित सीट बंटवारे को तय फार्मूला मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल भाजपा की घोषित रणनीति 117 सीटों पर चुनाव लडऩे की है।
2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों ने भी पंजाब में भाजपा की स्थिति को लेकर नई रणनीति बनाने का आधार दिया है। भाजपा को राज्य में करीब 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन पार्टी 13 लोकसभा सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। दूसरी ओर कांग्रेस ने सात और आम आदमी पार्टी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली थी।
इस बीच पंजाब भाजपा के भीतर संगठनात्मक स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संतोष के दौरे का प्रमुख उद्देश्य पार्टी संगठन की स्थिति का आकलन करना और आगामी चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना बताया गया है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में भाजपा अकेले चुनाव लडऩे की अपनी मौजूदा रणनीति पर कायम रहती है या फिर पुराने सहयोगी अकाली दल के साथ किसी नए राजनीतिक समझौते का रास्ता खुलता है।
पंजाब में अकाली-बीजेपी गठबंधन पर सस्पेंस, 117 सीटों पर अकेले लडऩे के ऐलान के बीच बढ़ी हलचल
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