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यस बैंक के बाद टाटा समूह विवाद में गृह मंत्री अमित शाह का नाम आया सामने

प्रकाशित: 28 Oct 2026, 5:05 PMअपडेट: 28 Oct 2026, 5:06 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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श्रीगंगानगर। यस बैंक का विवाद दुनिया देख और समझ चुकी है क्योंकि अचानक ही यस बैंक में आर्थिक संकट उत्पन्न होना बताया गया और प्रमोटर राणा कपूर को ईडी ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। एसबीआई, एचडीएफसी, एलआईसी आदि को शेयर आवंटित कर यस बैंक के संचालन की जिम्मेदारी दे दी गयी। बाद में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी कंपनी एसएमबीसी को बेच दी गयी? यह भी जांच का विषय है।
अब टाटा ट्रस्ट और टाटा संस का नेतृत्व को लेकर विवाद सामने आ रहा है। इन दोनों मामलों में समानता यह है कि दोनों ही विवाद में भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह का नाम जुड़ रहा है और यह बात दिल्ली से निकलकर छोटे-छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है।
यस बैंक के उपरांत टाटा संस में अमित शाह का सीधा दखल होने का आरोप लगाया जा रहा है और इस मामले को लेकर बुधवार 28 अक्टूबर को राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि एक व्यापारिक घराने के मामले में टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के अधिकारियों को अमित शाह के निवास पर क्यों बुलाया गया था।
क्या है विवाद
टाटा ट्रस्ट के पास 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके चेयरमैन नोएल नवल टाटा हैं और वे नहीं चाहते कि टाटा संस में मुख्य अधिकारी के पद पर नटराजन चंद्रशेखरन नियुक्त रहें। विवाद में चंद्रशेखरन को एक बार इस्तीफा भी देना पड़ा और इसके उपरांत उनको फिर से टाटा ट्रस्ट की असहमति के उपरांत भी नियुक्त किया गया। इसके उपरांत यह विवाद गहराता जा रहा है।
नमक से लेकर हवाई जहाज तक का व्यापार
टाटा समूह नमक से लेकर हवाई जहाज तक का व्यापार करता है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर टाटा समूह की उपस्थिति नहीं हो। घरेलू कार से लेकर व्यवसायिक ट्रक, बस तक का निर्माण किया जाता है। सॉफ्टवेयर क्षेत्र में टीसीएस का नाम है जो भारत की छठी सबसे बड़ी कंपनी है। सामाजिक क्षेत्र का दायित्व निभाते हुए यह ट्रस्ट देश में अनेक भागों में अस्पतालों का भी संचालन करता है। इनमें कैंसर रोकथाम और उपचार भी शामिल है।
भाजपा के नजदीकी टाटा परिवार रहा है और वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में विदेश संचार निगम लि. इस समूह को बेच दिया गया था और मोदी सरकार के कार्यकाल में एयर इंडिया की खरीद टाटा गु्रप ने की। रतन टाटा का निधन वर्ष 2024 में हो गया था इसके बाद ही टाटा समूह पर अमित शाह की नजर पड़ गयी, ऐसा बताया जा रहा है।
ध्यान देना होगा कि यस बैंक में हिस्सेदारी रखने वाली एसएमबीसी में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर जापानी निवेशकों के पास है।

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