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रूबियो के जामनगर यात्रा पर अमेरिका में चर्चा क्यों हो रही है?

प्रकाशित: 22 Oct 2026, 5:52 PMअपडेट: 22 Oct 2026, 5:52 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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श्रीगंगानगर। मार्को रूबियो की जामनगर यात्रा भारत और अमेरिका में चर्चा का विषय बन गयी है। रूबियो न तो वाणिज्य, वित्त, पेट्रोलियम मंत्री हैं फिर वे जामनगर क्यों गये?
असल में 21 अक्टूबर को रिलायंस जीओ का आईपीओ आया और उसी दिन विदेश मंत्री मार्को जामनगर पहुंच गये। इस तरह से एक व्यापारिक संदेश दिया गया है। भारतीय स्टॉक मार्केट इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है और निवेशकों के खरबों रुपये डूब चुके हैं।
विदेशी निवेशक भारतीय स्टॉक मार्केट छोड़ रहे हैं। इस बीच 30 हजार करोड़ रुपये का आईपीओ जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा बताया जा रहा है, को निश्चित सफलता दिलाने के लिए रूबियो की यात्रा का कार्यक्रम बनाया गया।
ट्रम्प और अम्बानी परिवार के बीच नजदीकी रिश्ते हैं। इन रिश्तों का महत्व क्या है, यह भी समझने की आवश्यकता है। 2024 में डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे और उस समय के आसपास एक बड़ी रकम रिलायंस की रियल इस्टेट कंपनी ने ट्रम्प की कंपनी को ट्रांसफर की थे। इसी तरह से अनंत अम्बानी, जो मुकेश अम्बानी के पुत्र हैं, के विवाह में इवांका ट्रम्प आईं थीं। भारतीय परिधान पहनकर उन्होंने कई वीडियोशूट में भाग लिया। इसके अतिरिक्त 2025 में जब ट्रम्प शपथ ग्रहण कर रहे थे संभवत: 21 फरवरी की तारीख थी, उस दिन मुकेश को भी आमंत्रित किया गया था।
चुनावों में विदेश कंपनियां चंदा नहीं दे सकतीं और इसका समाधान भी अमेरिकी राजनीतिक दलों ने निकाला हुआ है।
हाल ही में अम्बानी ने अमेरिका का दौरा किया और ट्रम्प से मुलाकात करते हुए टैक्सास में तेल रिफाइनरी में निवेश का एलान किया। जिस स्र्टाटअप, अमेरिका फस्र्ट रिफाइनिंग में निवेश किया है या करने वाले हैं, उसमें ट्रम्प परिवार के एक सदस्य की हिस्सेदारी है, की चर्चा है।
इस तरह से अम्बानी के आईपीओ को सफलता दिलाने के लिए रूबियो ने भारत की यात्रा की और जामनगर भी पहुंच गये। इस तरह से दुनिया को एक संदेश दिया। रूबियो राष्ट्रपति ट्रम्प के सबसे नजदीकी और राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। इस तरह से उनको ट्रम्प के बाद कैबिनेट में सबसे ज्यादा पॉवरफुल इंसान समझा जाये तो गलत नहीं होगा।
रूबियो के जामनगर जाने की चर्चा दुनिया के अनेक मीडिया हाउस ने की और उसको आमजन तक पहुंचाया। इसी तरह से भारत में अम्बानी समर्थक मीडिया हाउसेज को विदेश मंत्री का इंटरव्यू लेने का मौका मिल गया। इस तरह से यात्रा को बेहद कामयाब दर्शाया गया।

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