काठमांडू, 29 अगस्त। नेपाल में खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ खोज और बचाव अभियान शनिवार को फिर शुरू कर दिया गया। तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद सुरक्षाबल और राहत दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।
अधिकारियों के अनुसार, नेपाल और तिब्बत में करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई प्रभावित इलाके दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हैं, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़कें, पुल और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल सरकार ने आपदा से निपटने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने के लिए विशेषज्ञ विदेशी सहायता की अपील की है। सरकार का कहना है कि देश को तत्काल राहत के साथ-साथ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर संसाधनों की जरूरत होगी।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने रॉयटर्स को बताया कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती अनुमान के तौर पर करीब 4 से 5 अरब डॉलर की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह प्रारंभिक अनुमान है और नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद वास्तविक जरूरत इससे अलग हो सकती है।
आपदा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सीमा के आसपास के पहाड़ी इलाके शामिल हैं। तेज पानी और मलबे के बहाव ने घरों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है। राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक भोजन, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि खोज और बचाव अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। खराब मौसम अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है और परिस्थितियों के अनुसार अभियान में फिर बदलाव करना पड़ सकता है। सरकार और राहत एजेंसियां मृतकों तथा लापता लोगों के आंकड़ों को लगातार अपडेट कर रही हैं।








