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श्रीगंगानगर। राजस्थान राज्य बीज निगम के पूर्व निदेशक जुगल किशोर बिश्रोई से जुड़े बहुचर्चित बीज प्रकरण में अब एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एसीबी ने जुगल किशोर बिश्रोई और उनके भांजे सहित छह लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। एसीबी के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है।
बताया जा रहा है कि यह आरोप पत्र अंतिम रूप से पूरी जांच समाप्त होने के बाद नहीं, बल्कि जांच जारी रहने की जानकारी अदालत को देते हुए पेश किया गया है। यानी मामले में एसीबी की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी आगे आरोप पत्र अदालत में पेश किया जा सकता है।
इस घटनाक्रम ने करोड़ों रुपये की बरामदगी वाले इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
2.44 करोड़ रुपये की बरामदगी ने मचाई थी सनसनी : गौरतलब है कि 7 जून 2026 को एसीबी ने राजस्थान राज्य बीज निगम के तत्कालीन निदेशक जुगल किशोर बिश्रोई से जुड़े ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की थी। एसीबी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जुगल किशोर के घर से करीब 1.59 करोड़ रुपये और उनके भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के पास से बस में तलाशी के दौरान करीब 85 लाख रुपये बरामद हुए थे। दोनों रकम को मिलाकर बरामदगी करीब 2.44 करोड़ रुपये थी।
एसीबी की कार्रवाई का घटनाक्रम भी काफी महत्वपूर्ण रहा। एजेंसी को सूचना मिली थी कि बड़ी रकम एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जा रही है। इसके बाद लूणकरणसर क्षेत्र में एक निजी बस को रुकवाकर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान स्वतंत्र बिश्नोई के पास से 85 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई। इसके बाद एसीबी ने जुगल किशोर के बीकानेर स्थित आवास पर कार्रवाई की, जहां से करीब 1.59 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
नकली बीज प्रकरण से जुड़ा है पूरा मामला : यह कार्रवाई केवल करोड़ों रुपये की नकदी बरामदगी तक सीमित नहीं थी। पूरा मामला किसानों को उपलब्ध करवाए जाने वाले बीजों की गुणवत्ता और कथित तौर पर खराब या संदिग्ध बीजों की बिक्री से जुड़ा हुआ बताया गया है।
एसीबी की शुरुआती जांच के अनुसार गजराज ब्रांड के मूंगफली बीज के मामले में कार्रवाई की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार 27 मई 2026 को संबंधित बीजों के गोदाम पर कार्रवाई कर नमूने लिए गए थे और बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद इस कार्रवाई को प्रभावित करने, बीजों को वापस भेजने तथा आगे की कार्रवाई को कथित तौर पर प्रभावित करने के लिए पैसों के लेन-देन की जानकारी एसीबी तक पहुंची।
एक रिपोर्ट के मुताबिक एसीबी की जांच में आरोप है कि जुगल किशोर ने गजराज ब्रांड से जुड़े व्यक्ति से करीब 1.20 करोड़ रुपये और अन्य माध्यम से करीब 60 लाख रुपये की रकम ली।
85 लाख रुपये लेकर निकला था भांजा : एसीबी के अनुसार मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उस समय सामने आई जब जुगल किशोर के भांजे स्वतंत्र बिश्नोई को बड़ी नकदी के साथ बस में पकड़ा गया। रिपोर्टों में कहा गया कि एसीबी को सूचना मिली थी कि करीब 90 लाख रुपये श्रीगंगानगर की ओर भेजे जा रहे हैं। इसके बाद लूणकरणसर के पास बस को रुकवाकर तलाशी ली गई। स्वतंत्र के पास से 85 लाख रुपये नकद बरामद हुए।
इसके बाद हुई कार्रवाई में जुगल किशोर के आवास से 1.59 करोड़ रुपये मिलने के बाद कुल बरामदगी करीब 2.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
छह लोग जांच के घेरे में : मामले की शुरुआती कार्रवाई में जुगल किशोर बिश्नोई और उनके भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के अलावा बीज कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी एसीबी ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। उपलब्ध रिपोर्टों में गजराज ब्रांड के प्रोपराइटर किरण कपाडिय़ा सहित अन्य नामों का उल्लेख है।
अब छह लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आने से यह साफ है कि जांच एजेंसी ने मामले में कुछ लोगों के खिलाफ अपनी जांच को इस स्तर तक पहुंचा दिया है कि अदालत में अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके।
जांच अभी खत्म नहीं हुई : इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि छह लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद एसीबी ने जांच को बंद नहीं किया है।
एसीबी अधिकारी के अनुसार अदालत को यह जानकारी देते हुए आरोप पत्र पेश किया गया है कि मामले में अनुसंधान जारी है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है और जांच पूरी होने के बाद अलग से आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है। यानी 2.44 करोड़ रुपये की बरामदगी के बाद शुरू हुई जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है।
बीज कारोबार और सरकारी तंत्र की भूमिका पर उठे थे सवाल : इस पूरे प्रकरण ने राजस्थान में बीज कारोबार की निगरानी और सरकारी कार्रवाई की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। खास तौर पर इसलिए क्योंकि जुगल किशोर बिश्नोई खुद राजस्थान राज्य बीज निगम के निदेशक पद पर थे और बीजों से संबंधित सरकारी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर बैठे हुए थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जुगल किशोर को 2026 की शुरुआत में राज्य बीज निगम का निदेशक बनाया गया था। इससे पहले वे निजी क्षेत्र में काम कर चुके थे। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि वे कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के नेतृत्व में नकली बीज और खाद के खिलाफ चलाए गए अभियान से जुड़े रहे थे।
यही वजह है कि उनके खिलाफ एसीबी की कार्रवाई सामने आने के बाद मामला केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीजों के खिलाफ चलाए जा रहे सरकारी अभियान, उसकी निगरानी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे।
करोड़ों की नकदी ने बढ़ाई थी मामले की गंभीरता : एसीबी की कार्रवाई में एक साथ करीब ढाई करोड़ रुपये की नकदी बरामद होना इस मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू रहा। एसीबी के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 7 जून की कार्रवाई के दौरान जुगल किशोर के घर से 1.59 करोड़ और उनके भांजे से करीब 85 लाख रुपये बरामद होने का उल्लेख है। इसके बाद जुगल किशोर और अन्य आरोपितों को अदालत में पेश किए जाने तथा रिमांड की कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं। बाद में छह आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल—और कौन आएगा जांच के घेरे में? : छह आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अब इस प्रकरण में अगली नजर उन लोगों पर रहेगी जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आ सकती है।
क्योंकि एसीबी ने अदालत को साफ तौर पर जांच जारी रहने की जानकारी दी है, इसलिए यह मामला अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है। जांच में यदि रिश्वत के कथित लेन-देन की पूरी श्रृंखला, रकम के स्रोत, रकम के संभावित लाभार्थियों और सरकारी कार्रवाई को प्रभावित करने वाले अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो प्रकरण में और नाम जुड़ सकते हैं।
फिलहाल ढाई करोड़ की नकदी, बीज कार्रवाई को प्रभावित करने के आरोप और अब छह लोगों के खिलाफ आरोप पत्र—इन तीनों घटनाक्रमों ने बीज निगम प्रकरण को राजस्थान के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल कर दिया है।
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