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रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया: भारतीय कंपनी से एस्टोनिया गोला-बारूद सौदा

प्रकाशित: 7 Sep 2026, 2:49 PMअपडेट: 7 Sep 2026, 2:49 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एस्टोनिया में विवादित गोला-बारूद खरीद सौदे से जुड़ी भारतीय रक्षा कंपनी से उसका कोई संबंध या लेन-देन नहीं है।

इस विवाद के चलते एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर को पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

एस्टोनिया सरकार की यूक्रेन के लिए 155 मिलीमीटर तोप के गोला-बारूद की 7 करोड़ यूरो की खरीद से भारतीय कंपनी को जोड़कर सामने आई खबरों पर रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से कंपनी को न तो कोई ऑर्डर दिया गया है और न ही कोई आपूर्ति की गई है।

मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को कहा, “रक्षा मंत्रालय से इसका कोई संबंध या लेन-देन नहीं है।” उन्होंने बताया कि नेको डिफेंस म्यूनिशंस कंपनी नागपुर स्थित एक इस्पात विनिर्माण समूह का हिस्सा है।

सूत्रों के अनुसार कंपनी ने हाल ही में डाटासेल नाम की इटली की एक छोटी कंपनी का अधिग्रहण किया था, जो छोटे हथियारों और गोला-बारूद के निर्माण से जुड़ी है। समूह की रोमानिया में भी एक विनिर्माण इकाई है, जिसके पास एस्टोनिया को और उसके बाद यूक्रेन को आपूर्ति के लिए तोप के गोलों में विस्फोटक भरने का ठेका है।

हालांकि मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि कंपनी को भारतीय सशस्त्र बलों से आपूर्ति का कोई आदेश नहीं मिला है। सूत्रों ने कहा कि कंपनी की वेबसाइट पर किए गए दावे के अनुसार, उसने राज्य पुलिस को आपूर्ति की हो सकती है।

यह स्पष्टीकरण एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर के इस्तीफे के बाद आया। यूरोपीय संघ की ‘यूरोपीयन पीस फेसिलिटी’ के तहत यूक्रेन के लिए एस्टोनिया द्वारा गोला-बारूद की खरीद को लेकर विवाद बढ़ने के बीच पेवकुर ने इस्तीफे की घोषणा की।

यह विवाद 2024 में एस्टोनिया की रक्षा खरीद एजेंसी एस्टोनियाई सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट्स की ओर से यूक्रेन के लिए तोप के गोला-बारूद की खरीद के लिए दिए गए ठेकों से जुड़ा है।

करीब 7 करोड़ यूरो की इस खरीद का भुगतान यूरोपीय संघ की यूरोपीयन पीस फेसिलिटी के जरिए किया गया था। उस समय एस्टोनिया ने बड़ी अग्रिम राशि का भुगतान किया था और रूस के साथ युद्ध के बीच यूक्रेन को तोप के गोला-बारूद की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा था।

ये ठेके डाटासेल एसआरएल को दिए गए थे, जो इटली में पंजीकृत कंपनी है और जिसे मार्च 2024 में नागपुर स्थित नेको डिफेंस म्यूनिशंस ने अधिग्रहित किया था। इसके बाद कंपनी के तोप के गोले बनाने के अनुभव, आपूर्ति में देरी और समझौते के तहत दिए गए कुछ गोला-बारूद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।

एस्टोनिया के अधिकारियों ने 2025 में ठेका खत्म कर दिया और धन की वापसी के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की। एस्टोनिया के अभियोजन कार्यालय ने खरीद प्रक्रिया के कुछ पहलुओं की अलग से आपराधिक जांच भी शुरू की।

इस बीच, नेको डिफेंस और डाटासेल ने किसी भी गलत काम के आरोपों से इनकार किया है और ठेका विवाद से निपटने के एस्टोनिया के तरीके को चुनौती दी है। कंपनियों का कहना है कि विवाद गोला-बारूद की आपूर्ति में कमी के बजाय यूरोपीय नियमों और वित्त पोषण व्यवस्था में बदलाव से जुड़ा था।

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