श्रीगंगानगर। महंगाई इस समय चरम पर है। सरकारी आकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ एक राय होकर नया टैक्स की सौगात जनता को दी है।
2 हजार तक अर्थात 2001 से पूर्व की खरीददारी पर यूपीआई से भुगतान पर टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन इसके बाद टैक्स को वसूला जायेगा। पी टू पी याने पर्सन टू पर्सन भुगतान पर यह टैक्स नहीं लगेगा। टैक्स छोटे और मझौले दुकानदारों से आरंभ हो जायेगा। मर्चेंट्स पर यह टैक्स लागू होगा, लेकिन वसूला तो आम आदमी से ही किसी तरीके से जायेगा। दुकानदार अपने लाभ में से यह टैक्स भरने से रहा।
पहले जीएसटी टैक्स सहित सामान पर दाम लिखा होता था और अब साथ में यूपीआई टैक्स सहित भी अंकित होना आरंभ हो जायेगा। इस तरह से मोदी सरकार नयी सौगात लेकर आयी है।
पूर्व में सामान पर चुंगी व्यवस्था लागू थी, एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान जाने पर चुंगी टैक्स वसूला जाता था, जीएसटी ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया किंतु अब यूपीआई से सामान खरीदने पर टैक्स की दर निर्धारित कर दी गयी है।
जो सरकार कुछ माह पूर्व यूपीआई से ट्रांजेंक्शन के आकड़ों को अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रदर्शित करती थी। डिजीटल इंडिया का प्रचार किया जा रहा था और हालात यह थे कि बाजार में करंसी गायब हो गयी थी और करंसी की भारी कमी के कारण पिछले दिनों रेपो दरों में भी बदलाव किया गया था ताकि बाजार में ज्यादा नकदी उपलब्ध हो और आरबीआई ने 1 लाख करोड़ की नकदी को भी बाजार में भेजा था ताकि कैश के प्रवाह को बनाया जा सके।
हालांकि करंसी की कमी को व्यापारी अनुभव कर रहे थे किंतु यूपीआई उनकी इस कमी को पूरा कर रही थी और अब नया टैक्स लागू होने के बाद नकदी पर दबाव बनेगा। पहले ही बाजार में नकदी नहीं है। अब यूपीआई पर टैक्स लागू होने के बाद तो कैश पर दबाव बनना ही है और आशंका है कि इससे बाजार में मंदी का असर दिखाई दे सकता है।
जब सेवा कर (अब जीएसटी)आया था तो उस समय इसकी दर सिर्फ पांच प्रतिशत रखी गयी थी। आज यह 18 प्रतिशत या इससे भी अधिक है। 1994 में कांग्रेस सरकार इसको लेकर आयी थी और हर साल यह दर बढ़ती चली गयी और 2014-15 तक यह 18 प्रतिशत हो गयी थी। सरकार ने जब नया टैक्स सेवा कर लागू किया था तो उस समय सिर्फ तीन सेवाओं को शामिल किया था और आज रेस्टोरेंट पर भोजन करना भी सेवा कर के दायरे में आता है।
इसी तरह से नया टैक्स जो यूपीआई पर लगाया गया है, यह भी धीरे-धीरे हर ट्रांजेक्शन पर पहुंचने वाला है और इसको ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। सरकार 2029 से पूर्व इस व्यवस्था को बढावा देने का प्रयास भी करती नजर आ रही है।
सरकार का बजट तो घाटे में ही रहना है?
सरकार बनाते समय 2014 में पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सौगंध है मिट्टी की, देश को नहीं बिकने दूंगा, नहीं झुकने दूंगा। आज 12 सालों के कार्यकाल को देखा जाये तो मोदी ने एलआईसी, एयर इंडिया, इंडिया एयरलाइंस सहित अनेक कंपनियों को बेच दिया है और एयरपोर्ट भी अब निजी कंपनियों के हाथों में हैं।
हर साल सरकार अपने बजट घाटे को पूरा करने के नाम पर सरकारी उपक्रमों को बेच रही है या निजीकरण की ओर कदम बढ़ा रही है। हर साल एक कलेण्डर तैयार किया जाता है जिसमें यह निर्धारित किया जाता है कि बजट घाटे को कम करने के नाम पर किस कंपनी को बेचा जाना है या निजीकरण किया जाना है।
अब टैक्स वसूलने के बाद भी सरकार का बजट घाटे में ही चलना है। हां हर साल हजारों नहीं लाखों करोड़ रुपये सरकार तक पहुंच जायेंगे किंतु इस दोरान महंगाई की दर क्या होगी, यह जानना बहुत ही आवश्यक है।
UPI पर नया टैक्स: मोदी सरकार की नयी चुंगी व्यवस्था, महंगाई की आग को बढक़ायेगी
147 views



