श्रीगंगानगर। रायसिंहनगर में आयकर विभाग की जांच के बाद सामने आए मामले ने कथित हवाला कारोबार के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार 56 रेमिटर पार्टियों से जुड़े 1,405 फॉर्म-15CB के जरिए 8 अरब 15 करोड़ 52 लाख 13 हजार 553 रुपये यानी 815.52 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भेजे जाने का रिकॉर्ड सामने आया है। आयकर विभाग की शिकायत में इन रेमिटर में शामिल कई व्यक्तियों और कंपनियों को कथित तौर पर शेल/बोगस प्रकृति का बताया गया है। हालांकि, हवाला कारोबार में संलिप्तता का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मामले में आयकर विभाग के उप निदेशक (जांच) कन्हैया लाल मीणा की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर रायसिंहनगर थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के केंद्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट शेरिल गुप्ता हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने संबंधित रेमिटरों की ओर से विदेश भेजी जा रही रकम के लिए फॉर्म-15CB प्रमाण-पत्र जारी किए, जबकि शिकायत के अनुसार उन्होंने लेन-देन से संबंधित खातों, समझौतों और दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन नहीं किया।
610 करोड़ से ज्यादा एक ही नाम से
एफआईआर में दर्ज सूची का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा अरशद खान के नाम सामने आया है। दस्तावेज के अनुसार उनके नाम 990 लेन-देन दर्ज हैं, जिनकी कुल राशि 6,10,55,30,968 रुपये यानी 610.55 करोड़ रुपये से अधिक है। यह अकेला आंकड़ा ही उपलब्ध 815.52 करोड़ रुपये की कुल कथित रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा है।
इसके बाद गणेश सखाराम जाधव के नाम 71 लेन-देन में 44.63 करोड़ रुपये, एल कोमेटिडो मरीन शिपिंग के नाम 55 लेन-देन में 39.96 करोड़ रुपये और बुलफ्रॉग लॉजिस्टिक्स (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के नाम 35 लेन-देन में 28.17 करोड़ रुपये की राशि दर्ज है।
बल्लभ राम कुम्हार के नाम 15.63 करोड़ रुपये, एस्टोनिचा लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम 15.13 करोड़ रुपये, रोहित सिंह ठाकुर के नाम 9.09 करोड़ रुपये और लाला मंगरूप्रसाद गौड़ के नाम 5.99 करोड़ रुपये के लेन-देन दर्ज हैं।
56 रेमिटर, 1,405 ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड
आयकर विभाग की शिकायत में बताया गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड में 56 रेमिटर से जुड़े 1,405 फॉर्म-15CB प्रमाण-पत्रों के आधार पर 815.52 करोड़ रुपये की विदेशी रेमिटेंस का विवरण मिला है। वहीं कुल 1,674 फॉर्म-15CB में 66 रेमिटर शामिल होने की बात कही गई है। शेष प्रमाण-पत्र तकनीकी समस्या के कारण डाउनलोड नहीं हो सके।
जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम विदेश भेजने के पीछे वास्तविक कारोबारी गतिविधियां क्या थीं और इन रेमिटरों तथा विदेश में रकम प्राप्त करने वालों के बीच वास्तविक संबंध क्या था।
कई कंपनियां और व्यक्तियों के नाम
एफआईआर में गणेश सखाराम जाधव, एल कोमेटिडो मरीन शिपिंग, बुलफ्रॉग लॉजिस्टिक्स, एस्टोनिचा लॉजिस्टिक्स, रोहित सिंह ठाकुर, लाला मंगरूप्रसाद गौड़, रिंकू कुमार, कोमार्क सॉल्यूशंस, स्टालमार्ट स्मार्ट सॉल्यूशंस, टेकक्रू इन्फोटेक, शंटू शिवप्पा कलमानी, एवेन्यू लॉजिस्टिक्स, अरुण, कॉर्पविजन टेक्नोलॉजीज, अरुका सॉल्यूशंस, अजय वर्मा और दिनेश कुमार खोरवाल समेत कई नाम दर्ज हैं।
इसके अलावा सांथमेश फ्रेट एंड फॉरवर्डिंग सर्विसेज, SSMD लॉजिस्टिक्स, एप्पल शिपिंग लॉजिस्टिक्स, एज़्टर टेक्नो सॉल्यूशंस, संग्राम सिंह कूनर, दीपक शर्मा, परिमिटर ग्लोबल लॉजिस्टिक्स, शीतल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, काइमिक टेक्नोलॉजी और शिप सिक्योर फ्रेट सॉल्यूशन के नाम भी सूची में शामिल हैं।
आगे की सूची में गणेश लाल, अनुज कुमार, रिलोकैशन सॉफ्टवेयर, वंश धाभाई, एलनिशे शिपिंग इंडिया, टैलेंटबीट सॉफ्टवेयर, काइउस लॉजिस्टिक्स, रेडी IQ सॉफ्टवेयर लैब्स, R U इम्पोर्ट्स एक्सपोर्ट्स, ओन्जी लॉजिस्टिक्स, अतुल दयाशंकर जायसवाल, ARGBISS लॉजिस्टिक्स और KEA फिनटेक सहित कई अन्य नाम दर्ज हैं।
छोटी रकम से लेकर करोड़ों तक के लेन-देन
सूची में बड़े लेन-देन के साथ अपेक्षाकृत छोटी रकम वाले रेमिटर भी शामिल हैं। इनमें विनेश अट्टीगोडु चंद्रशेखरा, ई-शिरिस्टी रिसाइक्लर्स, BHI MGR बिजनेस सॉल्यूशंस, मैजेंट लॉजिस्टिक्स एंड शिपिंग, सीसेल कार्गो फॉरवर्डर्स, कृष्ण, व्हीलगो लॉजिस्टिक्स, अकाब एंटरप्राइजेज और अमीरा शिपिंग एजेंसिज जैसे नाम हैं।
सूची के अंतिम हिस्से में संदीप चंद्रसेनन नायर, ललित, पर्ल इमिग्रेशन (OPC) प्राइवेट लिमिटेड, डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्पोर्ट्स फाउंडेशन और TCRP फाउंडेशन के नाम भी दर्ज हैं। इनके नाम पर दर्ज रकम लाखों रुपये से लेकर कुछ हजार रुपये तक है।
शेल कंपनियों के जरिए रकम भेजने का आरोप
आयकर विभाग की शिकायत में कहा गया है कि सूची में शामिल कुछ संस्थाएं आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं अथवा बेहद कम कारोबार दिखा रही थीं, जबकि उनके नाम पर बड़ी विदेशी रेमिटेंस दर्ज हुईं। इसी आधार पर शिकायत में इन संस्थाओं को शेल संस्थाओं की प्रकृति का बताया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट शेरिल गुप्ता ने संबंधित दस्तावेजों की जांच किए बिना फॉर्म-15CB प्रमाणित किए। आयकर विभाग के अनुसार इन्हीं प्रमाण-पत्रों के आधार पर संबंधित रेमिटरों को विदेश में रकम भेजने में सुविधा मिली।
जांच में सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क
शिकायत में यह भी कहा गया है कि शेरिल गुप्ता के अलावा ऐसे अन्य मध्यस्थों की भूमिका की भी जांच की जरूरत है, जिन्होंने कथित तौर पर समूह या सिंडिकेट के रूप में इन गतिविधियों को सुविधाजनक बनाया हो। ऐसे में पुलिस जांच में यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि रकम किन देशों में गई, वास्तविक लाभार्थी कौन थे, भारत में रकम का स्रोत क्या था और रेमिटरों तथा विदेश स्थित लाभार्थियों के बीच किस तरह का कारोबारी संबंध था।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
21 अगस्त 2026 को शिकायत के आधार पर रायसिंहनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई और जांच सहायक उप निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को सौंपी गई। दस्तावेज में पुलिस कार्रवाई के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज होने का उल्लेख है।
फिलहाल 815.52 करोड़ रुपये से अधिक की कथित विदेशी रेमिटेंस, 56 रेमिटर और 1,405 फॉर्म-15CB का यह मामला जांच के घेरे में है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।






