श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव: बहुमत से 3 सीट दूर भाजपा, निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी
श्रीगंगानगर। नगर परिषद के 65 वार्डों के सामने आए परिणामों ने अब शहर की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं। भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 33 सीटों के आंकड़े से वह तीन सीट दूर है। कांग्रेस को 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 18 सीटों पर जीत मिली है। कांग्रेस और निर्दलीयों की कुल संख्या 35 है, जो बहुमत के आंकड़े से दो अधिक है।
65 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा 33 माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम तीन पार्षदों का अतिरिक्त समर्थन हासिल करना होगा। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के साथ ही अब राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र निर्दलीय पार्षद बन गए हैं।
भाजपा के पास सबसे बड़ी पार्टी का फायदा
भाजपा के पास 30 पार्षद हैं। वह बहुमत के आंकड़े 33 से केवल तीन सीट पीछे है। इसका अर्थ है कि भाजपा यदि तीन निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में कर लेती है तो उसका आंकड़ा 33 पहुंच जाएगा।
भाजपा के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे बहुमत हासिल करने के लिए 18 में से केवल तीन निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी। यदि भाजपा को चार, पांच या उससे अधिक निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो उसका बोर्ड बनाने का दावा और मजबूत हो जाएगा।
कांग्रेस के साथ 35 का आंकड़ा
कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं। उसके साथ सभी 18 निर्दलीय पार्षद आ जाते हैं तो कुल संख्या 35 हो जाएगी। यानी कांग्रेस और निर्दलीयों का संयुक्त आंकड़ा बहुमत के आंकड़े 33 से दो अधिक है।
लेकिन राजनीतिक चुनौती यह है कि कांग्रेस को बहुमत के लिए कम से कम 16 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के 17 पार्षदों के साथ 16 निर्दलीय जुड़ने पर आंकड़ा 33 हो जाएगा।
इसलिए संख्या के लिहाज से कांग्रेस के पास बहुमत का रास्ता मौजूद है, लेकिन उसके लिए बड़ी संख्या में निर्दलीयों को एकजुट करना भाजपा की तुलना में कठिन चुनौती हो सकती है।
निर्दलीय बने किंगमेकर
श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव में 18 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने उन्हें सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह बना दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सत्ता तक पहुंचने का रास्ता काफी हद तक इन्हीं पार्षदों से होकर गुजरता है।
यदि तीन निर्दलीय भाजपा के साथ आ जाते हैं, तो भाजपा 33 के बहुमत तक पहुंच जाएगी। दूसरी ओर कांग्रेस को 16 निर्दलीयों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
यानी निर्दलीयों की संख्या केवल 18 है, लेकिन परिषद के बोर्ड गठन में उनका राजनीतिक महत्व कहीं ज्यादा है।
क्या भाजपा आसानी से बोर्ड बना पाएगी?
सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी होना बोर्ड बनाने की गारंटी नहीं है। भाजपा के पास 30 सीटें हैं और उसे तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। इसलिए अगले कुछ दिनों में भाजपा की रणनीति मुख्य रूप से निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने पर केंद्रित रहने की संभावना है।
भाजपा के लिए सबसे आसान गणित तीन निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना है। यदि पार्टी ऐसा करने में सफल रहती है तो उसके पास 33 का बहुमत होगा।
लेकिन यदि निर्दलीय पार्षदों में से तीन से कम भाजपा के साथ आते हैं, तो मामला फिर से जटिल हो जाएगा और उसे अन्य समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।
कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
कांग्रेस 17 सीटों के साथ भाजपा से 13 सीट पीछे है। हालांकि उसके पास निर्दलीयों के साथ गठजोड़ का विकल्प मौजूद है। कांग्रेस यदि 16 निर्दलीयों को अपने साथ कर लेती है तो उसका आंकड़ा 33 पहुंच जाएगा।
लेकिन कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 18 निर्दलीयों में से इतनी बड़ी संख्या को अपने साथ बनाए रखना होगी। यदि कुछ निर्दलीय भाजपा के साथ चले जाते हैं तो कांग्रेस का बहुमत का गणित कमजोर हो सकता है।
सत्ता की चाबी किसके हाथ?
मौजूदा आंकड़ों को देखें तो स्थिति इस प्रकार है:
भाजपा — 30 सीटें
कांग्रेस — 17 सीटें
निर्दलीय — 18 सीटें
कुल — 65 सीटें
बहुमत — 33 सीटें
भाजपा को बहुमत के लिए — 3 अतिरिक्त सीटों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस को बहुमत के लिए — 16 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन चाहिए।
कांग्रेस + निर्दलीय — 35 सीटें, यदि सभी निर्दलीय कांग्रेस के साथ हों।
इस पूरे समीकरण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका 18 निर्दलीय पार्षदों की है। भाजपा को केवल तीन निर्दलीयों को अपने साथ लाने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम 16 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर नगर परिषद का चुनाव परिणाम भाजपा के लिए मजबूत लेकिन पूरी तरह निर्णायक नहीं है। 30 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल है, लेकिन बहुमत से तीन सीट पीछे है। कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं और निर्दलीयों के साथ उसका संभावित आंकड़ा 35 तक पहुंच सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में असली मुकाबला चुनाव मैदान में नहीं, बल्कि पार्षदों के समर्थन को लेकर होगा। भाजपा के लिए तीन निर्दलीय पार्षद निर्णायक साबित हो सकते हैं, जबकि कांग्रेस को अपने पक्ष में कम से कम 16 निर्दलीयों को एकजुट करना होगा।
फिलहाल श्रीगंगानगर नगर परिषद में 18 निर्दलीय पार्षद ‘किंगमेकर’ की स्थिति में हैं। इनका रुख तय करेगा कि 33 के बहुमत का आंकड़ा भाजपा पार करती है या कांग्रेस-निर्दलीय गठजोड़ सत्ता का रास्ता खोलता है।