वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के साथ ही यह सवाल भी तेज हो गया है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्रवादी राजनीतिक फार्मूला डेमोक्रेट्स पर भारी पड़ने वाला है? ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह “अमेरिका फर्स्ट” की नीति को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया है, अब उसी नीति के परिणामों को रिपब्लिकन पार्टी चुनावी मुद्दे के रूप में पेश करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि सत्ता संभालने के बाद लिए गए फैसलों का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों, अमेरिकी श्रमिकों और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना रहा है। उनका दावा है कि इन नीतियों का असर अमेरिकी शेयर बाजार और बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।
शेयर बाजार बना ट्रंप की नीतियों का आईना?
ट्रंप प्रशासन के समर्थक अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के प्रदर्शन को अपनी नीतियों की सफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी कंपनियों में निवेश और बाजार में बढ़ता भरोसा यह संकेत देता है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।
एप्पल जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनी का मजबूत प्रदर्शन भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। वहीं एलन मस्क की कंपनियों की तेजी और उनकी संपत्ति में अभूतपूर्व वृद्धि को भी ट्रंप समर्थक अमेरिका में कारोबारी माहौल के बदलने से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, दूसरी ओर डेमोक्रेट्स इन आंकड़ों को केवल सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण मानने से इनकार कर सकते हैं। शेयर बाजार की तेजी में वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र, ब्याज दरों और कंपनियों के अपने प्रदर्शन जैसे कई कारक भी भूमिका निभाते हैं।
19 ट्रिलियन डॉलर का निवेश—सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा?
ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में करीब 19 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का दावा भी राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। यदि यह निवेश वास्तव में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर रोजगार, उत्पादन और औद्योगिक विस्तार में बदलता है तो रिपब्लिकन पार्टी इसे मध्यावधि चुनाव में बड़ा राजनीतिक हथियार बना सकती है।
ट्रंप के लिए चुनौती यह होगी कि इन बड़े आंकड़ों को आम अमेरिकी मतदाता के रोजमर्रा के जीवन से कैसे जोड़ा जाए। रोजगार, महंगाई, वेतन, आवास और उपभोक्ता कीमतें ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा असर मतदाता के फैसले पर पड़ता है।
राष्ट्रवाद बनाम पुरानी राजनीति
ट्रंप की राजनीति का सबसे मजबूत हथियार उनका राष्ट्रवादी एजेंडा माना जाता है। अमेरिका की कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना, विदेशी व्यापार में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की आर्थिक ताकत को आगे रखना उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा रहा है।
अब रिपब्लिकन पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर सकती है कि “अमेरिका फर्स्ट” केवल नारा नहीं बल्कि आर्थिक नीति है।
यदि मतदाता इस दावे को स्वीकार करते हैं और आर्थिक आंकड़ों का लाभ रिपब्लिकन पार्टी को मिलता है, तो मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है।