ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। ढाका ने संकेत दिया है कि भारत यात्रा के लिए अनुकूल माहौल जरूरी है और इसके साथ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। बांग्लादेश भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है, जबकि नई दिल्ली ने कहा है कि दोनों देशों के संबंध आपसी हित और पारस्परिकता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में शेख हसीना का मुद्दा लगातार सबसे संवेदनशील विषय बना हुआ है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद हसीना भारत आ गई थीं। इसके बाद ढाका ने उनके प्रत्यर्पण की मांग की। तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर भी बांग्लादेश की ओर से यह संकेत दिया गया कि द्विपक्षीय माहौल सुधारने के लिए हसीना के प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध पर भारत की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
इसी बीच बांग्लादेश की पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के साथ बढ़ती नजदीकी ने क्षेत्रीय समीकरणों को और महत्वपूर्ण बना दिया है। 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने को सभी पर हमला माना गया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के अधिकारियों ने इस समझौते में शामिल होने की संभावना को सकारात्मक नजर से देखने की बात कही है, हालांकि अभी बांग्लादेश इसका सदस्य नहीं बना है।
यह घटनाक्रम भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश भौगोलिक और रणनीतिक रूप से भारत का बेहद महत्वपूर्ण पड़ोसी है। ढाका यदि पाकिस्तान-तुर्किये-सऊदी अरब के नेतृत्व वाले किसी नए सुरक्षा ढांचे के करीब जाता है तो दक्षिण एशिया में कूटनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि फिलहाल बांग्लादेश के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इसे अभी संभावित दिशा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के रक्षा संबंधों में भी नई प्रगति हुई है। भारतीय सेना ने अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियां खरीदने के लिए समझौता किया है। अमेरिकी दूतावास ने सौदे की पुष्टि की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सौदे का मूल्य करीब 45.7 करोड़ डॉलर नहीं बल्कि 45.7 मिलियन डॉलर बताया गया है, हालांकि अमेरिकी पक्ष की शुरुआती घोषणा में वित्तीय विवरण और संख्या सार्वजनिक नहीं की गई थी। इस सौदे से भारत की टैंक रोधी क्षमता मजबूत होने के साथ दोनों देशों के रक्षा सहयोग में भी वृद्धि का संकेत मिलता है।
वैश्विक स्तर पर भी भारत के सामने बदलते समीकरणों की चुनौती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 24 सितंबर को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है और दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित बैठक को लेकर तैयारियां चल रही हैं। चीन और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय बातचीत बढ़ने के बीच भारत को अपने अमेरिका, चीन और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा।
कुल मिलाकर बांग्लादेश की मौजूदा विदेश नीति में भारत के साथ तनाव, पाकिस्तान और मुस्लिम देशों के साथ बढ़ते संपर्क तथा चीन और अमेरिका के बीच बदलते समीकरण एक साथ दिखाई दे रहे हैं। इसे भारत के लिए तत्काल “खतरे की घंटी” कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन दक्षिण एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को देखते हुए नई दिल्ली के लिए बांग्लादेश की दिशा पर नजर रखना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से इसलिए भी चिंतित होना आवश्यक है क्योंकि पाकिस्तान अब अमेरिका का बेहद खास हो चुका है और ईरान के साथ अमेरिकी टकराव को टालने और समझौता करवाने में वह कामयाब होता दिख रहा है। पहले भी वह समझौता करवा चुका है जिसको इस्लामाबाद डायलॉग का नाम दिया गया था। चीन और पाकिस्तान पहले ही मित्र हैं। भारत का बीजिंग के साथ सीमा विवाद हाल ही में फिर से उभरकर सामने आया था। दोनों देशों में वार्ता भी हुई है। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने जिस देश की पहली यात्रा की है, वह चाइना ही था। इस तरह से ढाका की विदेश नीति पूरी तरह से बदल चुकी है।








