काठमांडू। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस के अनुसार नेपाल में 93 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
नेपाल में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर आंकड़े सामने आए हैं। नेपाल पुलिस के 28 अगस्त के अपडेट में 469 लोगों की मौत की पुष्टि और 2,381 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। बाद के अपडेट में मृतकों की संख्या 553 तक पहुंचने की सूचना सामने आई है।
नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 बताई जा रही है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में करीब 1,900 और तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में 558 लोग लापता बताए गए थे। चीन की ओर से भी राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
बाढ़ ने सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई हुई। हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
इस आपदा के बाद एक और बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। मलबे से नदी का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण एक झीलनुमा जलाशय बन गया है और उसके टूटने की स्थिति में नीचे के इलाकों में फिर से तेज बाढ़ आ सकती है। अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने को कहा है।
नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में हजारों सुरक्षाकर्मी और हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। कई विदेशी नागरिक भी लापता बताए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक शामिल हैं। लगातार बढ़ते मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों के बीच नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं राहत अभियान जारी है।








