काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और अचानक आए मलबे के सैलाब के करीब एक सप्ताह बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए बचाव दल अस्थायी पुल बना रहे हैं, जबकि हिमालयी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त जलविद्युत परियोजनाओं के मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम भी तेज किया गया है।
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ और मलबे की इस आपदा में मृतकों की संख्या बढक़र 987 हो गई है, जबकि करीब 4 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 639 लोग भी लापता या संपर्क से बाहर हैं और उनकी तलाश जारी है।
राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 11,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। कई प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। बचाव दल मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े करीब 300 श्रमिकों को मलबे और बाढ़ के बीच से सुरक्षित निकाला जा चुका है। कई स्थानों पर सडक़ और पुल बह जाने के कारण बचाव दलों को अस्थायी रास्ते तैयार करने पड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि हजारों नागरिकों ने अपने घर, परिवार, प्रियजनों और संपत्ति को खो दिया है। उन्होंने प्रभावित लोगों की मदद के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहायता जारी रखने की बात कही है। शुरुआती विशेषज्ञ आकलनों में ग्लेशियर ढहने से अचानक आए पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ के सैलाब को आपदा का प्रमुख कारण बताया गया है।
नेपाल सरकार के सामने अब लापता लोगों की तलाश, प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। इस बीच बचाव दल मलबे में संभावित जीवित लोगों की तलाश के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
नेपाल में बाढ़ और मलबे के सैलाब में 987 मृतक, 4000 लापता
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