मुंबई। भारत में बड़े मूल्य के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने को लेकर बैंकों और भुगतान कंपनियों के साथ चर्चा की गई है। Reuters ने मंगलवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब सरकार ने UPI के बड़े लेनदेन पर शुल्क लगाने का कानूनी रास्ता साफ किया है।
Reuters की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुड़े अधिकारी 2,000 रुपये से अधिक के बड़े व्यापारी भुगतान पर लगभग 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के विकल्प पर विचार कर रहे थे। हालांकि उस समय अंतिम दर और शुल्क के बंटवारे पर फैसला नहीं हुआ था।
बाद में NPCI ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क व्यापारियों से संबंधित लेनदेन पर लागू होगा। सामान्य व्यापारियों के लिए 75,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
कुछ विशेष श्रेणियों, जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन से जुड़े व्यापारियों के लिए 5 रुपये का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) निर्धारित किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि NPCI के अनुसार व्यापारी यह शुल्क ग्राहकों से UPI भुगतान स्वीकार करते समय सीधे नहीं वसूल सकेंगे।
UPI के जरिए व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। Reuters के अनुसार अगस्त में UPI पर करीब 24 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 311 अरब डॉलर था।
NPCI के अनुसार नए शुल्क से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल भुगतान ढांचे की मजबूती, नवाचार, साइबर सुरक्षा और ग्राहक सेवा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।



