वॉशिंगटन/ताइपे, 17 सितंबर (रॉयटर्स) — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली संभावित मुलाकात से पहले एशिया में अमेरिका के सहयोगी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ट्रंप चीन के साथ आर्थिक समझौते के बदले ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी रुख में कोई नरमी दिखा सकते हैं। रॉयटर्स ने ताइवान, जापान और अमेरिका के अधिकारियों, सांसदों तथा विश्लेषकों से बातचीत के आधार पर यह जानकारी दी है।
रॉयटर्स के अनुसार, चिंता उस समय बढ़ी जब ट्रंप ने मई में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को संभावित “मोलभाव का साधन” बताया था। ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में किसी भी बदलाव का संकेत चीन को प्रोत्साहित कर सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, ऐसा कुछ अधिकारियों और विश्लेषकों ने कहा है।
ताइवान के एक वरिष्ठ अधिकारी शेन यू-चुंग ने कहा कि ताइवान सरकार अमेरिका के सामने अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रख रही है और उम्मीद करती है कि ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं होगा जिससे ताइवान को नुकसान पहुंचे। ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग आगामी बैठक में ताइवान का मुद्दा उठाएंगे।
जापान भी इस बैठक पर करीबी नजर रख रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, जापानी अधिकारियों और सत्तारूढ़ दल के नेताओं को आशंका है कि ट्रंप चीन से अमेरिकी वस्तुओं की खरीद जैसे आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए ताइवान के मुद्दे पर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकते हैं। हालांकि जापान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप और जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच किसी बैठक की पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका की मौजूदा “वन चाइना” नीति के तहत वॉशिंगटन ताइवान की संप्रभुता पर औपचारिक स्थिति नहीं लेता और बीजिंग के ताइवान पर दावे को स्वीकार करने के बजाय उसे मान्यता देता है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता।
रॉयटर्स के अनुसार, ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में संभावित बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू करीब 14 अरब डॉलर का अमेरिकी हथियार पैकेज भी है, जिसकी मंजूरी लंबे समय से लंबित है। ट्रंप ने मई में इस पैकेज को रोकते हुए इसे चीन के साथ बातचीत में “बहुत अच्छा मोलभाव का साधन” बताया था।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन की ओर से ताइवान नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। ट्रंप-शी बैठक में ताइवान के अलावा व्यापार और अन्य अमेरिका-चीन मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।



