काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे की लहर के बाद तबाही का दायरा लगातार सामने आ रहा है। मंगलवार तक नेपाल में मरने वालों की संख्या 1,003 तक पहुंच गई, जबकि करीब 3,916 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। चीन में हुई मौतों को जोडऩे पर इस आपदा में कुल मृतकों का आंकड़ा 1,000 से काफी ऊपर पहुंच गया है।
आपदा के बाद दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। चीन, भारत और नेपाल की विशेष बचाव टीमें अस्थायी पुल बनाकर कटे हुए इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। हेलीकॉप्टर, उत्खनन मशीनों और भारी उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर राहत और खोज अभियान चलाया जा रहा है।
सबसे मुश्किल अभियान जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में चल रहा है। बाढ़, चट्टानों और कीचड़ के कारण कई सुरंगों के रास्ते बंद हो गए हैं। करीब 300 श्रमिकों को अब तक बचाया जा चुका है, जबकि नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार जलविद्युत परियोजनाओं में 639 लोग अब भी फंसे या लापता हैं। बचाव दल खुदाई मशीनों, ड्रिल और अन्य भारी उपकरणों से सुरंगों तक पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटे हैं।
इस प्राकृतिक आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से हुई। बर्फ, चट्टान और पानी के भारी प्रवाह ने नीचे की घाटियों में तबाही मचा दी। रासुवा, नुवाकोट समेत कई इलाकों में घर, सडक़ें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।
नेपाल सरकार के मुताबिक 11 हजार से ज्यादा लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। प्रभावित इलाकों में 9,200 से अधिक सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्यों में लगाए गए हैं। कई क्षेत्रों में सडक़, बिजली और संचार व्यवस्था बहाल करने का काम भी जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण अभियान बेहद कठिन बना हुआ है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और अस्थिर होने का जोखिम बढ़ रहा है। नेपाल की ताजा त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी और महत्वपूर्ण जलविद्युत बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़, मृतकों की संख्या 1,000 के पार और 3,916 लापता
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