श्रीगंगानगर। भारत में सरकारी स्कूल का जिक्र तीन विषयों में ही सुर्खियां बनता है, 1 नंबर बिंदु है अध्यापकों का तबादला और स्कूल की तालाबंदी, 2 नंबर बिंदु : सरकारी विद्यालय के छात्र ने प्रतियोगी परीक्षा अथवा बोर्ड मेरिट में स्थान प्राप्त किया, बिंदु नंबर तीन : सरकारी स्कूल में अनहोनी।
देश के अन्तिम छोर का व्यक्ति भी जानता है कि शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। वह प्राइवेट शिक्षा के लिए अपने जीवन-भर की कमाई देने को तैयार हो जाता है लेकिन सरकारी स्कूली व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन में शिरकत नहीं करता।
यही कारण है कि भारत में सरकारी स्कूलों में अध्ययन की गुणवत्ता निम्रस्तरीय होने के बावजूद कभी बड़ा आंदोलन देखने को नहीं मिला और यह एक गांव, एक कस्बे अथवा एक जिले तक ही सीमित होकर रह जाता है।
फ्रांस, ईटली सहित पश्चिमी देशों में हालात ऐसे नहीं थे किंतु अब वहां पर भी भ्रष्टाचार की बुराई पहुंच गयी है। इन देशों में जेन जी आंदोलनरत है और लाखों लोग संघर्ष कर रहे हैं।
फ्रांस में कई स्थानों पर लूटपाट और आगजनी की घटनाएं हुईं। प्रदर्शन का अधिकार के तहत भीड़ एकत्र हुई थी और फिर कब हिंसक हो गयी, किसी को नहीं पता। सरकार आपातकाल पर विचार कर रही थी फिलहाल कफ्र्यू से ही काम चलाया जा रहा है। पेरिस में शांति है तो ईटली, ऑस्ट्रिया आदि देशों में अब आगजनी हो रही है और वहां पर शिक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं।
इमैनुअल मैक्रान प्रशासन के लिए चिंता का कारण यह भी है कि अब वीकेण्ड समाप्त हो गया है और शनिवार-रविवार को क्या होगा, कोई नहीं कह सकता। फ्रांस में कुछ साल पहले भी येलो वेस्ट सप्ताहांत सडक़ों पर उतर आते थे और लिविंग कोस्ट को मुद्दा बनाकर राहत की मांग करते थे।
यूरोप जल रहा है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक बार फिर से फ्रांस पर टिप्पणी करने का मौका मिल गया और उन्होंने कहा, यूएसए पहले भी चेता चुका है कि यूरोपीय देशों को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने की आवश्यकता है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, पेरिस शीघ्र ही मुस्लिम बाहुल्य शहर बन जायेगा।
भारत में सरकारी स्कूल आंदोलन सीमित, यूरोप में शिक्षा विरोध बढ़ते हुए
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