श्रीगंगानगर। नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में फिलहाल पांच प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो असली तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच से नहीं, बल्कि नामांकन वापसी के बाद सामने आएगी। किस प्रत्याशी के साथ कितने पार्षद खड़े हैं और कौन अंतिम समय तक मैदान में रहता है, यही चुनाव की दिशा तय करने वाला प्रमुख पहलू होगा।
भाजपा के सिम्बल पर 30 पार्षदों की जीत के बावजूद चुनावी समीकरण पूरी तरह सीधे दिखाई नहीं दे रहे हैं। परिणाम के बाद पार्षदों की गतिविधियों और अलग-अलग खेमों के साथ उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
संजय मूंदड़ा और अजय दावड़ा ‘लक्की’ के बीच संभावित मुकाबले को लेकर सबसे अधिक चर्चा है। मूंदड़ा के साथ कुछ प्रमुख स्थानीय कारोबारी और कॉलोनाइजरों के समर्थन की चर्चा है, जबकि लक्की के साथ भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी के होने की बात सामने आ रही है। हालांकि अंतिम रूप से किसके पास कितने पार्षदों का समर्थन है, इसकी आधिकारिक तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
कांग्रेस की ओर से अनूपसिंह बाजवा मैदान में हैं। इसके अलावा दो अन्य प्रत्याशियों की मौजूदगी मुकाबले को बहुकोणीय बना सकती है। ऐसे में नामांकन वापसी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि एक-दूसरे के खिलाफ खड़े प्रत्याशियों में से कुछ नाम वापस लेते हैं तो मुकाबला सीमित प्रत्याशियों के बीच रह सकता है। दूसरी ओर, सभी प्रमुख प्रत्याशी मैदान में रहते हैं तो पार्षदों के समर्थन का गणित और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।
किंगमेकर की चर्चा भी तेज
सभापति पद के साथ-साथ उन पार्षदों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चा है जो अंतिम परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि बाड़ाबंदी और पार्षदों से संपर्क की चर्चाएं चुनावी माहौल में सबसे अधिक सुर्खियों में हैं।
हालांकि इन चर्चाओं और सट्टा बाजार के आकलनों को आधिकारिक चुनावी स्थिति नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति मतदान के दौरान पार्षदों के समर्थन और अंततः घोषित परिणाम से ही स्पष्ट होगी।
कल नामांकन वापसी के बाद सबसे पहले यह पता चलेगा कि पांच में से कितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहते हैं। इसके बाद ही सभापति पद के चुनाव का वास्तविक गणित समझ में आएगा। फिलहाल श्रीगंगानगर की राजनीति में सवाल एक ही है—मुकाबला सीधा होगा या कई कोणों वाला?



