श्रीगंगानगर। नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में अब मुकाबला पूरी तरह से दो प्रत्याशियों के बीच सिमट गया है। नाम वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस के अनूपसिंह बाजवा, निर्दलीय दयाराम कुलचानिया और सुशील चावला ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिये। इसके बाद कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी संजय मूंदड़ा और भाजपा के अजय लक्की दावड़ा के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है।
सभापति पद के लिए अंतिम फैसला 21 तारीख को होने वाले मतदान के बाद सामने आएगा। नाम वापसी के दिन कांग्रेस नेताओं और संजय मूंदड़ा समर्थकों के बीच हुई बातचीत के बाद तीनों प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया।
सूत्रों के अनुसार बातचीत के दौरान यह शर्त रखी गई कि यदि कांग्रेस के सभी 17 पार्षद एकजुट होकर समर्थन करते हैं, तभी आगे की रणनीति बनाई जाएगी। कांग्रेस की ओर से खुला समर्थन देने का भरोसा मिलने के बाद अनूपसिंह बाजवा सहित निर्दलीय दयाराम कुलचानिया और सुशील चावला ने नाम वापस ले लिया।
दयाराम कुलचानिया चांडक गुट से जुड़े माने जाते हैं, जबकि सुशील चावला मूल कांग्रेसी हैं। अब इन दोनों नेताओं के नाम वापसी के बाद संजय मूंदड़ा के पक्ष में समीकरण मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर भाजपा खेमे में भी अंदरूनी हलचल बनी हुई है। दोनों ही पक्षों को क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों में कुछ ऐसे पार्षद हैं जिनकी निष्ठा को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जिससे मतदान के दिन स्थिति बदलने की संभावना बनी हुई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 के नगर परिषद चुनावों में भी भाजपा को अंदरूनी मतभेदों के कारण बोर्ड बनाने में सफलता नहीं मिल पाई थी। इस बार भी सभापति पद के चुनाव में पार्षदों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। 21 तारीख को होने वाली वोटिंग से ही स्पष्ट होगा कि नगर परिषद की कमान किसके हाथ में जाएगी।



