\n
Tuesday, September 15, 2026
Home Blog

Trump to Meet Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif on 23 September, Then China’s Xi Jinping on 24 September in Washington

0

US President Donald Trump is expected to meet Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif on 23 September during the 81st session of the United Nations General Assembly in New York. Reports indicate that the meeting could take place at the welcome ceremony for heads of state and government hosted by President Trump and First Lady Melania Trump, where Sharif will also be present.

During the encounter, the leaders may discuss matters of regional significance, including India‑Pakistan relations, Kashmir, and the Indus Water Treaty. Sharif is scheduled to address the UNGA on 25 September, and his speech is anticipated to touch on the Indus Water Treaty and Kashmir. India has suspended the Indus Water Treaty since the 2025 Peshawar attack, a point that Pakistan has repeatedly raised on international platforms. No official confirmation has yet been issued regarding the specific topics that will be covered in the Trump‑Sharif dialogue.

On the following day, 24 September, Trump is slated to meet Chinese President Xi Jinping in Washington. Trump had announced in July that Xi would visit the United States on that date, and the two leaders are expected to discuss a range of issues including artificial intelligence, trade, tariffs, technology, and broader strategic differences. Negotiations may also address a potential reduction in reciprocal tariffs on approximately $30 billion worth of goods.

These two consecutive days could prove pivotal for U.S. diplomacy, with the first meeting potentially addressing South Asian and India‑Pakistan concerns, and the second focusing on U.S.–China relations and global strategic matters.

ट्रंप 23 सितंबर को शहबाज शरीफ से मिलेंगे, 24 सितंबर को शी जिनपिंग से वॉशिंगटन में चर्चा

0

ट्रंप पहले शहबाज शरीफ से मिलेंगे, फिर 24 सितंबर को शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना

वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सितंबर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग मुलाकात करने की संभावना है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप और शहबाज शरीफ की मुलाकात 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हो सकती है, जबकि ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक 24 सितंबर को वॉशिंगटन में प्रस्तावित है।

शहबाज शरीफ से मुलाकात में भारत-पाक संबंधों पर चर्चा की संभावना

शहबाज शरीफ 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक 23 सितंबर को ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की ओर से UNGA में शामिल राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों के लिए आयोजित स्वागत समारोह में शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे। इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच बातचीत होने की संभावना है।

पाकिस्तान की ओर से इस बातचीत में भारत-पाकिस्तान संबंध, कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। शहबाज शरीफ 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और रिपोर्टों के अनुसार उनके भाषण में भी सिंधु जल संधि तथा कश्मीर से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता मिल सकती है।

भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखा है। पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। हालांकि ट्रंप-शहबाज बातचीत में इन मुद्दों पर वास्तव में क्या चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

24 सितंबर को शी जिनपिंग से मुलाकात

इसके अगले दिन यानी 24 सितंबर को ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वॉशिंगटन में मुलाकात प्रस्तावित है। ट्रंप ने जुलाई में कहा था कि शी 24 सितंबर को अमेरिका आएंगे और दोनों नेताओं के बीच AI समेत कई मुद्दों पर बातचीत होगी।

अमेरिका-चीन बैठक में व्यापार, टैरिफ, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं। चीन और अमेरिका के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर पारस्परिक शुल्क में संभावित कमी को लेकर भी बातचीत चल रही है।

इस तरह 23 और 24 सितंबर अमेरिका की कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दिन हो सकते हैं। पहले ट्रंप की शहबाज शरीफ से बातचीत में दक्षिण एशिया और भारत-पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे चर्चा में आने की संभावना है, जबकि अगले दिन शी जिनपिंग के साथ अमेरिका-चीन संबंधों और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

Amodei and Altman Warn About AI Safety, Trump Calls New Regulations a “SICK Conspiracy”

0

Washington — The rapid growth of artificial intelligence (AI) and its potential risks have intensified debate in the technology community. Anthropic CEO Dario Amodei has called for measures to slow the pace of advanced AI development and strengthen safety protocols, while OpenAI CEO Sam Altman has echoed the need for greater caution and coordinated safety efforts.

Amodei, speaking on Saturday, proposed that the development of advanced AI, or “frontier models,” be somewhat slowed and that independent safety audits be implemented. He argued that AI capabilities are increasing quickly and that safety systems need more time to keep pace.

Altman agreed that AI progress should continue but that companies must better coordinate for safety. He supported keeping the development pace somewhat restrained, describing it as a way to responsibly advance AI rather than halt it.

Former President Donald Trump has opposed calls for additional government “guardrails” on AI. Trump said the United States already has sufficient criminal and regulatory powers to control and penalise AI companies if necessary. He dismissed concerns about AI and data centres as a “SICK conspiracy” and warned that such measures would benefit China.

Experts remain divided over the potential dangers of AI. Some believe that highly capable AI could be misused in cyber attacks, bioweapon research, and other serious activities, while others see no broad scientific consensus on the likelihood or timeline of AI systems causing global catastrophe. The debate raises the question of whether the global AI race should be accelerated or slowed to strengthen safety measures. For now, industry leaders like Amodei and Altman are calling for caution, whereas the Trump administration appears to prioritize American leadership and competition in AI development.

अमोदेई और ऑल्टमैन ने AI सुरक्षा पर चेतावनी दी, ट्रंप ने ‘बीमार साजिश’ कहा

0

वॉशिंगटन। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के तेजी से बढ़ते विकास और इससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर तकनीकी जगत में बहस तेज हो गई है। Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने उन्नत AI के विकास की गति को नियंत्रित करने और सुरक्षा उपाय मजबूत करने की अपील की है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी AI के विकास की रफ्तार को लेकर अधिक सावधानी और सुरक्षा समन्वय की जरूरत पर सहमति जताई है।

अमोदेई ने शनिवार को एक प्रस्ताव में उन्नत AI यानी ‘फ्रंटियर मॉडल’ के विकास को कुछ हद तक धीमा करने तथा स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट जैसे उपायों की वकालत की। उनका तर्क है कि AI की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था को उसके साथ कदम मिलाकर चलने के लिए अधिक समय चाहिए।

ऑल्टमैन ने भी कहा कि AI की प्रगति जारी रहनी चाहिए, लेकिन कंपनियों को सुरक्षा के लिए बेहतर समन्वय करना चाहिए। उन्होंने विकास की गति को कुछ हद तक नियंत्रित रखने का समर्थन किया और इसे AI को रोकने के बजाय जिम्मेदारी से आगे बढ़ाने का तरीका बताया।

ट्रंप ने सुरक्षा चिंताओं को खारिज किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI पर अतिरिक्त सरकारी ‘गार्डरेल’ की मांग का विरोध किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास AI कंपनियों को नियंत्रित और जरूरत पड़ने पर दंडित करने के लिए पर्याप्त आपराधिक और नियामकीय शक्तियां पहले से मौजूद हैं। उन्होंने AI और डेटा सेंटरों के खिलाफ उठ रही चिंताओं को “SICK conspiracy” यानी “बीमार साजिश” बताया और कहा कि इससे चीन को फायदा होगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि AI के लिए जिस नियंत्रण या ‘गार्डरेल’ की जरूरत है, उसके लिए अमेरिका के पास एक मजबूत और बुद्धिमान राष्ट्रपति है। उन्होंने AI विकास में अमेरिकी बढ़त बनाए रखने पर जोर दिया।

AI से मानवता के लिए खतरे पर विशेषज्ञों में मतभेद

AI से जुड़े संभावित खतरों को लेकर विशेषज्ञों में पूरी सहमति नहीं है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सक्षम AI का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों, जैविक हथियारों से जुड़े अनुसंधान और अन्य गंभीर गतिविधियों में हो सकता है। दूसरी ओर, मौजूदा AI प्रणालियों के मानव नियंत्रण से बाहर होकर वैश्विक तबाही पैदा करने की संभावना और समय-सीमा को लेकर कोई व्यापक वैज्ञानिक सहमति नहीं है।

इस विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—AI की वैश्विक दौड़ को तेज रखा जाए या सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए इसकी रफ्तार कुछ धीमी की जाए। फिलहाल अमोदेई और ऑल्टमैन जैसे AI उद्योग के प्रमुख चेहरे अधिक सावधानी की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन AI विकास में अमेरिकी नेतृत्व और प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता देता दिखाई दे रहा है।

Social Media Trolling of Mukesh Shah Fuels Debate After BJP Losses in Wards 34 and 36

0

After the municipal council election results were announced, discussions on social media intensified over the BJP candidates’ defeats in Wards 34 and 36. Mukesh Shah, a coloniser, also became a target of trolling by users.

It is reported that Mukesh Shah played a role in securing BJP tickets for Bibiita Arora in Ward 34 and Mahesh Saraswat in Ward 36. Both wards largely fall within the Riddhi‑Siddhi First and Riddhi‑Siddhi Second Colony areas, and Shah had also put his political reputation on the line in these wards.

Following the results, some users posted various comments about Shah. One user wrote, “मुकेश शाह की राजनीति की भ्रूण हत्या हो गई।” Other users made remarks in their own style, though some comments were deemed inappropriate for public posting.

Mukesh Shah’s upcoming assembly election preparations have been a subject of ongoing discussion. The municipal council election, where he helped secure tickets for two candidates, is seen as part of his broader political strategy.

The trolling that began after the defeats in Wards 34 and 36 is being viewed as a form of political analysis of the election outcomes.

मुकेश शाह पर सोशल मीडिया ट्रोलिंग, वार्ड 34 और 36 में भाजपा हार के बाद चर्चा बढ़ी

0

सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए मुकेश शाह, वार्ड 34 और 36 में भाजपा की हार के बाद बढ़ी चर्चा

श्रीगंगानगर। नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद वार्ड नंबर 34 और 36 में भाजपा प्रत्याशियों की हार को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन दोनों वार्डों में भाजपा को मिली हार के बाद कॉलोनाइजर मुकेश शाह भी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए और उन्हें ट्रोल किया गया।

बताया जाता है कि वार्ड नंबर 34 में बबीता अरोड़ा और वार्ड नंबर 36 में महेश सारस्वत को भाजपा का टिकट दिलाने में मुकेश शाह की भूमिका रही थी। दोनों वार्डों का काफी हिस्सा रिद्धि-सिद्धि फर्स्ट और रिद्धि-सिद्धि सेकेंड कॉलोनी क्षेत्र में आता है। ऐसे में शाह ने इन दोनों वार्डों में प्रत्याशियों के पक्ष में अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगाई थी।

चुनाव परिणाम आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने शाह को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां कीं। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि “मुकेश शाह की राजनीति की भ्रूण हत्या हो गई।” इसके अलावा कुछ अन्य यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि कुछ टिप्पणियां ऐसी थीं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से लिखना उचित नहीं माना जा सकता।

विधानसभा चुनाव की तैयारी में शाह

मुकेश शाह के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारियों की चर्चा लगातार होती रही है। ऐसे में नगर परिषद चुनाव में दो वार्डों के प्रत्याशियों को टिकट दिलाने और उनके पक्ष में राजनीतिक प्रभाव दिखाने को उनकी आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा था।

हालांकि वार्ड 34 और 36 में भाजपा प्रत्याशियों की हार के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई ट्रोलिंग को चुनावी परिणामों के राजनीतिक विश्लेषण के रूप में देखा जा रहा है।

हनुमानगढ़ : गणेशराज बंसल समर्थित निर्दलीय पार्षदों ने नगर परिषद में 34 सीटें जीतकर बहुमत बनाया

0

हनुमानगढ़। नगर परिषद चुनाव परिणामों ने हनुमानगढ़ की राजनीति में एक बार फिर निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल का प्रभाव साबित किया है। नगर परिषद के 60 वार्डों में से 34 वार्डों में बंसल समर्थित निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा के 15, कांग्रेस के 10 और एक अन्य प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।

चुनाव परिणाम के बाद निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के समर्थक पार्षदों का आंकड़ा बहुमत से काफी आगे पहुंच गया है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से नगर परिषद में बोर्ड बनाने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।

बंसल की पत्नी को नहीं मिली जीत

नगर परिषद चुनाव में गणेशराज बंसल की पत्नी भी चुनाव मैदान में थीं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल सकी। इसके बाद अब चेयरपर्सन पद के लिए बंसल समर्थक महिला निर्दलीय पार्षदों में से किसी एक के नाम पर विचार किए जाने की संभावना है। 34 निर्दलीय पार्षदों में यदि कोई महिला पार्षद चेयरपर्सन पद के लिए चुनी जाती हैं तो बंसल गुट का बोर्ड बनने की स्थिति मजबूत हो जाएगी।

भाजपा-कांग्रेस को पीछे छोड़ा

हनुमानगढ़ के चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि मतदाताओं ने भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में समर्थन दिया। 60 वार्डों में 34 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए स्थानीय स्तर पर चुनौती खड़ी कर दी है।

भाजपा को 15 और कांग्रेस को 10 सीटें मिलने के बावजूद दोनों दल बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गए। इसके विपरीत बंसल समर्थित निर्दलीयों ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।

गणेशराज बंसल का बढ़ता प्रभाव

निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के लिए यह चुनाव परिणाम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के रूप में जीत हासिल करने के बाद नगर परिषद चुनाव में भी उनके समर्थकों की बड़ी संख्या में जीत ने हनुमानगढ़ की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ का संकेत दिया है।

भाजपा और कांग्रेस जैसे स्थापित राजनीतिक दलों के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान कायम करने वाले बंसल अब नगर परिषद में भी अपने समर्थकों के जरिए बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं। चुनाव परिणाम के बाद स्थानीय राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अब नजर चेयरपर्सन के चुनाव पर

34 निर्दलीय पार्षदों के साथ गणेशराज बंसल गुट के पास बोर्ड गठन के लिए मजबूत स्थिति है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि चेयरपर्सन पद के लिए किस महिला पार्षद के नाम पर सहमति बनती है। यदि बंसल समर्थक पार्षद एकजुट रहते हैं तो हनुमानगढ़ नगर परिषद में निर्दलीयों का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा सकता है।

हालांकि अंतिम तस्वीर चेयरपर्सन चुनाव और पार्षदों के आधिकारिक समर्थन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

सादुलशहर नगरपालिका चुनाव परिणाम के बाद प्रदीप खीचड़ को जयपुर से बुलावा, पत्नी को भाजपा टिकट मिलने की चर्चा

0

सादुलशहर। सादुलशहर नगरपालिका चुनाव के परिणामों ने स्थानीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। 25 वार्डों में से 22 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत के बाद पूर्व भाजपा निर्वाचित अध्यक्ष प्रदीप खीचड़ का राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव परिणाम आने के बाद खीचड़ को जयपुर से फोन आने और उनके जयपुर रवाना होने की खबर है।

प्रदीप खीचड़ इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय रहे। उनके समर्थन वाले 22 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। दूसरी ओर भाजपा के 25 प्रत्याशियों में से 23 को हार का सामना करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के भी 24 प्रत्याशी चुनाव हार गए। परिणाम के अनुसार भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि 22 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।

परिणाम के बाद खीचड़ ने कहा कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ प्रचार नहीं किया और वे आज भी मन से भाजपाई हैं। इसके बाद शाम को जयपुर से उनके पास फोन आने और तत्काल जयपुर रवाना होने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रदीप खीचड़ की पत्नी को भाजपा का सिम्बल दिया जा सकता है और उनके समर्थक निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो नगरपालिका में भाजपा के पक्ष में सभापति पद का रास्ता साफ होने की संभावना जताई जा रही है और निर्विरोध निर्वाचन के समीकरण भी बन सकते हैं। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा सामने आना बाकी है।

सादुलशहर की राजनीति में बढ़ा खीचड़ का प्रभाव

चुनाव परिणाम के बाद प्रदीप खीचड़ को सादुलशहर की राजनीति में प्रभावशाली रणनीतिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों की संख्या में हुए इजाफे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ थाने पहुंच गए।

बताया जा रहा है कि उनके समर्थकों ने पुलिस थाने का घेराव किया। इसके बाद एडीशनल एसपी दीपक शर्मा के साथ खीचड़ की वार्ता हुई।

मारपीट मामले में कार्रवाई की मांग

बताया गया कि 11 मार्च को वार्ड नंबर 5 में मतदान स्थल के पास प्रदीप खीचड़ के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में उनके द्वारा एफआईआर दर्ज करवाए जाने की बात कही गई है। खीचड़ ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एडीशनल एसपी के समक्ष अपनी बात रखी।

उन्होंने थानाधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाने तथा विधायक के गनमैन को निलंबित करने की मांग भी रखी। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार पुलिस की ओर से उनकी मांगों पर सहमति जताई गई है। सूत्र का दावा है कि आचार संहिता हटने के बाद थानाधिकारी का औपचारिक तबादला किया जा सकता है और गनमैन के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि थानाधिकारी के तबादले और गनमैन के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

अब नजर जयपुर से होने वाले फैसले पर

सादुलशहर नगरपालिका चुनाव के परिणामों ने प्रदीप खीचड़ को एक बार फिर स्थानीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। 22 निर्दलीय पार्षदों की जीत के बाद उनके राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। अब सभी की निगाहें जयपुर में होने वाली राजनीतिक बातचीत और भाजपा की ओर से लिए जाने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं।

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव: भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत के लिए 3 सीटों की दरकार

0

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव: बहुमत से 3 सीट दूर भाजपा, निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी

श्रीगंगानगर। नगर परिषद के 65 वार्डों के सामने आए परिणामों ने अब शहर की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं। भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 33 सीटों के आंकड़े से वह तीन सीट दूर है। कांग्रेस को 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 18 सीटों पर जीत मिली है। कांग्रेस और निर्दलीयों की कुल संख्या 35 है, जो बहुमत के आंकड़े से दो अधिक है।

65 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा 33 माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम तीन पार्षदों का अतिरिक्त समर्थन हासिल करना होगा। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के साथ ही अब राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र निर्दलीय पार्षद बन गए हैं।

भाजपा के पास सबसे बड़ी पार्टी का फायदा

भाजपा के पास 30 पार्षद हैं। वह बहुमत के आंकड़े 33 से केवल तीन सीट पीछे है। इसका अर्थ है कि भाजपा यदि तीन निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में कर लेती है तो उसका आंकड़ा 33 पहुंच जाएगा।

भाजपा के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे बहुमत हासिल करने के लिए 18 में से केवल तीन निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी। यदि भाजपा को चार, पांच या उससे अधिक निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो उसका बोर्ड बनाने का दावा और मजबूत हो जाएगा।

कांग्रेस के साथ 35 का आंकड़ा

कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं। उसके साथ सभी 18 निर्दलीय पार्षद आ जाते हैं तो कुल संख्या 35 हो जाएगी। यानी कांग्रेस और निर्दलीयों का संयुक्त आंकड़ा बहुमत के आंकड़े 33 से दो अधिक है।

लेकिन राजनीतिक चुनौती यह है कि कांग्रेस को बहुमत के लिए कम से कम 16 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के 17 पार्षदों के साथ 16 निर्दलीय जुड़ने पर आंकड़ा 33 हो जाएगा।

इसलिए संख्या के लिहाज से कांग्रेस के पास बहुमत का रास्ता मौजूद है, लेकिन उसके लिए बड़ी संख्या में निर्दलीयों को एकजुट करना भाजपा की तुलना में कठिन चुनौती हो सकती है।

निर्दलीय बने किंगमेकर

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव में 18 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने उन्हें सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह बना दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सत्ता तक पहुंचने का रास्ता काफी हद तक इन्हीं पार्षदों से होकर गुजरता है।

यदि तीन निर्दलीय भाजपा के साथ आ जाते हैं, तो भाजपा 33 के बहुमत तक पहुंच जाएगी। दूसरी ओर कांग्रेस को 16 निर्दलीयों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

यानी निर्दलीयों की संख्या केवल 18 है, लेकिन परिषद के बोर्ड गठन में उनका राजनीतिक महत्व कहीं ज्यादा है।

क्या भाजपा आसानी से बोर्ड बना पाएगी?

सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी होना बोर्ड बनाने की गारंटी नहीं है। भाजपा के पास 30 सीटें हैं और उसे तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। इसलिए अगले कुछ दिनों में भाजपा की रणनीति मुख्य रूप से निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने पर केंद्रित रहने की संभावना है।

भाजपा के लिए सबसे आसान गणित तीन निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना है। यदि पार्टी ऐसा करने में सफल रहती है तो उसके पास 33 का बहुमत होगा।

लेकिन यदि निर्दलीय पार्षदों में से तीन से कम भाजपा के साथ आते हैं, तो मामला फिर से जटिल हो जाएगा और उसे अन्य समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती

कांग्रेस 17 सीटों के साथ भाजपा से 13 सीट पीछे है। हालांकि उसके पास निर्दलीयों के साथ गठजोड़ का विकल्प मौजूद है। कांग्रेस यदि 16 निर्दलीयों को अपने साथ कर लेती है तो उसका आंकड़ा 33 पहुंच जाएगा।

लेकिन कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 18 निर्दलीयों में से इतनी बड़ी संख्या को अपने साथ बनाए रखना होगी। यदि कुछ निर्दलीय भाजपा के साथ चले जाते हैं तो कांग्रेस का बहुमत का गणित कमजोर हो सकता है।

सत्ता की चाबी किसके हाथ?

मौजूदा आंकड़ों को देखें तो स्थिति इस प्रकार है:

भाजपा — 30 सीटें
कांग्रेस — 17 सीटें
निर्दलीय — 18 सीटें
कुल — 65 सीटें
बहुमत — 33 सीटें

भाजपा को बहुमत के लिए — 3 अतिरिक्त सीटों का समर्थन चाहिए।

कांग्रेस को बहुमत के लिए — 16 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन चाहिए।

कांग्रेस + निर्दलीय — 35 सीटें, यदि सभी निर्दलीय कांग्रेस के साथ हों।

इस पूरे समीकरण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका 18 निर्दलीय पार्षदों की है। भाजपा को केवल तीन निर्दलीयों को अपने साथ लाने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम 16 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर नगर परिषद का चुनाव परिणाम भाजपा के लिए मजबूत लेकिन पूरी तरह निर्णायक नहीं है। 30 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल है, लेकिन बहुमत से तीन सीट पीछे है। कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं और निर्दलीयों के साथ उसका संभावित आंकड़ा 35 तक पहुंच सकता है।

इसलिए आने वाले दिनों में असली मुकाबला चुनाव मैदान में नहीं, बल्कि पार्षदों के समर्थन को लेकर होगा। भाजपा के लिए तीन निर्दलीय पार्षद निर्णायक साबित हो सकते हैं, जबकि कांग्रेस को अपने पक्ष में कम से कम 16 निर्दलीयों को एकजुट करना होगा।

फिलहाल श्रीगंगानगर नगर परिषद में 18 निर्दलीय पार्षद ‘किंगमेकर’ की स्थिति में हैं। इनका रुख तय करेगा कि 33 के बहुमत का आंकड़ा भाजपा पार करती है या कांग्रेस-निर्दलीय गठजोड़ सत्ता का रास्ता खोलता है।

श्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव: 65 वार्डों के परिणाम जारी, भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय जीते

0

श्रीगंगानगर। नगर परिषद चुनाव के सामने आए वार्डवार परिणामों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। 65 वार्डों के उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने बड़ी संख्या में जीत दर्ज की है, जबकि कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी बाजी मारी है।

वार्ड 1 में अनूप सिंह बाजवा कांग्रेस, वार्ड 2 में संगीता देवी भाजपा, वार्ड 3 में महेंद्र जांगिड़ भाजपा, वार्ड 4 में कर्मजीत कौर कांग्रेस और वार्ड 5 में संजय शर्मा भाजपा विजयी रहे। वार्ड 6 में सुशील चावला कांग्रेस तथा वार्ड 7 में रामा देवी कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

वार्ड 8 में नमिता सेठी निर्दलीय, वार्ड 9 में निर्वेन्द्र बराड़ भाजपा, वार्ड 10 में अमनप्रीत सिंह भाजपा और वार्ड 11 में दिलीप लावा निर्दलीय विजयी रहे। वार्ड 12 में किशन गोपाल (बंटी) भाजपा और वार्ड 13 में राजविन्दर कौर भाजपा ने जीत हासिल की।

वार्ड 14 में जगदीश घोड़ेला निर्दलीय, वार्ड 15 में कृष्ण लाल कांग्रेस और वार्ड 16 में शांति मिड्ढा निर्दलीय विजयी रहीं। वार्ड 17 में भगवान सहाय महेन्द्रा भाजपा, वार्ड 18 में रेनू मैथिया भाजपा और वार्ड 19 में सावित्री बागड़ी निर्दलीय विजयी रहीं। वार्ड 20 में शीला देवी भाजपा ने जीत दर्ज की।

वार्ड 21 से भरत पल मैय्यर भाजपा, वार्ड 22 से हरविन्दर सिंह भाजपा और वार्ड 23 से सन्नी नागपाल भाजपा विजयी रहे। वार्ड 24 में सुशील वर्मा निर्दलीय तथा वार्ड 25 में अमनप्रीत निर्दलीय ने जीत हासिल की। वार्ड 26 में कमल कुमार भाजपा और वार्ड 27 में रवीना नारंग भाजपा विजयी रहीं।

वार्ड 28 में रोहताश कांग्रेस, वार्ड 29 में रितु धवन निर्दलीय और वार्ड 30 में जीवन प्रीत सिंह भाजपा विजयी रहे। वार्ड 31 में मोनू बजाज निर्दलीय, वार्ड 32 में सरोज भाजपा तथा वार्ड 33 में सचिन कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

वार्ड 34 में सुमन निम्बा निर्दलीय, वार्ड 35 में राकेश कुमार पेन्सिया भाजपा और वार्ड 36 में हेमराज निर्दलीय विजयी रहे। वार्ड 37 में सुमन गेदर निर्दलीय, वार्ड 38 में परमजीत कौर निर्दलीय और वार्ड 39 में पुष्पा देवी निर्दलीय विजयी रहीं।

वार्ड 40 में दयाराम कुलचानिया निर्दलीय, वार्ड 41 में प्रियंक भाटी भाजपा, वार्ड 42 में अनीता झिंझा भाजपा और वार्ड 43 में गौरव मित्तल भाजपा ने जीत दर्ज की।

वार्ड 44 में भारत भूषण कांग्रेस, वार्ड 45 में आकाश उपवेजा भाजपा और वार्ड 46 में विक्रम राठौड़ निर्दलीय विजयी रहे। वार्ड 47 में अमनदीप कौर भाजपा, वार्ड 48 में राम रतन कांग्रेस तथा वार्ड 49 में इंद्रजीत निर्दलीय विजयी रहे।

वार्ड 50 में दिनेश कुमार भाजपा, वार्ड 51 में राधा कांग्रेस और वार्ड 52 में कमला बिश्नोई कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वार्ड 53 में नवाब खान निर्दलीय तथा वार्ड 54 में अमरजीत गिल भाजपा विजयी रहे।

वार्ड 55 में संजय मूंदड़ा भाजपा, वार्ड 56 में गगनदीप कौर कांग्रेस और वार्ड 57 में शिल्पा पाहुजा भाजपा विजयी रहीं। वार्ड 58 में अजय दावड़ा भाजपा, वार्ड 59 में अनमोल भाजपा और वार्ड 60 में सुनीता देवी इन्दोरा कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

वार्ड 61 में बलवंत चौधरी भाजपा, वार्ड 62 में किरण देवी कांग्रेस, वार्ड 63 में आकाश इन्दोरा कांग्रेस और वार्ड 64 में सुनीता देवी कांग्रेस विजयी रहीं। वार्ड 65 में चंचल कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विजयी रहीं।

BREAKING NEWS