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अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाए प्रतिबंध, कारोबार करने वाले देशों को भी कड़ी चेतावनी

प्रकाशित: 24 Aug 2026, 11:09 PMअपडेट: 24 Aug 2026, 11:09 PMपढ़ने का समय: 3 मिनट
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वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाते हुए सोमवार को नए प्रतिबंधों की घोषणा की। ट्रंप प्रशासन ने इसे ईरान की वैश्विक वित्तीय कड़ियों को कमजोर करने और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन का लक्ष्य ईरान की उन आर्थिक गतिविधियों को निशाना बनाना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्व और वित्तीय सहायता मिलती है।

अमेरिका ने करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इनका संबंध ईरान की आर्थिक गतिविधियों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क से बताया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक डिजिटल एसेट, सोना, तकनीक, विमानन और शिपिंग जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की तैयारी है।

बेसेंट ने ईरान की वैश्विक वित्तीय कड़ियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को व्यापक आर्थिक अभियान बताया। उन्होंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों को संकेत दिया कि अगर उन्होंने तेहरान के साथ व्यापारिक संबंध जारी रखे तो उन्हें भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सोमवार को ऐसे देशों के खिलाफ तत्काल नए दंड लागू नहीं किए गए और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन देशों को सबसे पहले निशाना बनाया जाएगा।

चीन पर भी नजर

अमेरिकी कदम में ईरान के तेल कारोबार से जुड़े चीनी वित्तीय संस्थानों को तत्काल प्रतिबंधित नहीं किया गया। चीन ईरान के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल है। अमेरिकी प्रशासन ने हालांकि संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश या संस्था को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर करने की कार्रवाई की जा सकती है।

अमेरिका का दावा है कि ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों से बचने के लिए अलग-अलग कंपनियों, जहाजों और वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है। वॉशिंगटन अब इन्हीं नेटवर्क को निशाना बनाकर तेहरान की विदेशी मुद्रा और तेल से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना चाहता है।

ईरान ने किया विरोध

अमेरिकी प्रतिबंधों के ऐलान के बाद ईरान ने इसकी आलोचना की है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। दोनों देशों के बीच तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से गंभीर स्थिति बनी हुई है।

तेल बाजार पर भी असर

ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा के बावजूद सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। Reuters के अनुसार ब्रेंट क्रूड करीब 2.35 प्रतिशत गिरकर 92.17 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी WTI भी 2.35 प्रतिशत गिरकर 85.01 डॉलर प्रति बैरल रहा। बाजार में माना गया कि प्रतिबंधों की घोषणा काफी हद तक पहले से अनुमानित थी।

फिलहाल अमेरिका का अगला कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वॉशिंगटन ने ईरान के साथ व्यापार करने वालों के खिलाफ व्यापक secondary sanctions की चेतावनी तो दी है, लेकिन सोमवार को सभी संभावित कठोर कदम तत्काल लागू नहीं किए गए। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की बड़ी घोषणा माना जा रहा है, न कि प्रतिबंधों की अंतिम और पूरी कार्रवाई।

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